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यहां रोटी के लिए सजती है डोली

यहां रोटी के लिए सजती है डोली

यह सचमुच पेट की आग बुझाने की विवशता का नजारा है। सूबे के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार बांका स्थित मंदार पर्वत के समीप रोज सजती डोली वालों की दुकान खुद सब कुछ बयां करती है। महज चंद रुपये...   आगे..

मां की जुबान में रोते हैं शिशु

मां की जुबान में रोते हैं शिशु

यदि आप से कहा जाए कि बच्चों के रोने या चीखने चिल्लाने की भी भाषा होती है तो आप इस पर विश्वास नहीं करेंगे क्योंकि एक नए अध्ययन में सुझाया गया है कि बच्चे गर्भावस्था में ही अपनी मातृ भाषा को...   आगे..

किसानों की परेशानी...

किसानों की परेशानी...

बाबा जित्तो के गुनहगार जब अपने आप को लोहे की सुंगलों से पीटते हुए झिड़ी के मेले में जय बावे की.. कर रहे थे ठीक उसी वक्त कठुआ के हटली गांव का किसान दाता राम आलू के बीज के लिए दर दर भटक रहा था।   आगे..

विकास योजनाओं में लेवी

विकास योजनाओं में लेवी

केंद्र सरकार ने तो थैली गरीबी और पिछड़ापन दूर करने के लिए खोली, लेकिन उससे अपनी झोली भरने लगे नक्सली। माओवादियों के सर्वाधिक प्रभाव वाले 34 जिलों में त्वरित विकास के तहत केंद्र से भेजी जाने...   आगे..

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Nov 07, 12:08 AM
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