सरकार ने अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी रखने का वायदा करते हुए कहा कि उसने वित्त वर्ष 2009-10 में वैश्विक मंदी से निपटने के लिए 1,86,000 करोड़ रुपये दिए। ...
खाद्य सुरक्षा का सरकारी वादा तो बरकरार है, लेकिन थोड़ा इंतजार करना होगा। फिलहाल विधेयक पर चर्चा होगी, जरूरी हुआ तो संशोधन होगा और फिर उस पर संसद की मुहर लगेगी। उसके बाद मिलेगी आपको खाद्य सुरक्षा। ...
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का बजट आर्थिक समीक्षा की तुलना में काफी बौना साबित हुआ। जहां आर्थिक समीक्षा से अंदाजा लगाया जा रहा था कि बजट में जबरदस्त घोषणाएं की जाएंगी, वहीं दादा का पिटारा सुधारों की जमीन भी कायदे से नहीं खुरच सका। ...
केंद्र सरकार ने सोमवार को खेल मंत्रालय को वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए 3073 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि अगले साल यहां होने वाले राष्ट्रकुल खेलों के लिए 3472 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। ...
मंदी के मारों को राहत, एक बड़ा टैक्स गायब और ऊपर से कर रियायत, सबको लुभाने वाली तरह-तरह की अदाएं और सरकारी स्कीमों के लिए पैसे की धाराएं..दस लाख करोड़ रुपये के खर्च का तिलिस्म है यह!!! इसके असर पर मत जाइए, बस दादा का बजट जादू देखते जाइए। प्रणब दा का बजट लोगों पर पुराना नपा-तुला लोकुलभावन कांग्रेसी सम्मोहन करता है और सुधारों के मंत्र या घाटे की चिंताओं को फिलहाल पीछे रखता है। ...