अब उद्योग जगत को भी वास्तविकता स्वीकार करनी होगी। टैक्स के मामले में राहत की बहुत ज्यादा उम्मीद बांधना अर्थव्यवस्था के इन हालात में उचित नहीं है। पिछले साल की मंदी के बाद कर राजस्व के मोर्चे पर जो स्थितियां बनी थीं, उनमें वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के झोले से इससे ज्यादा निकलना शायद मुमकिन नहीं था। हां, वित्त मंत्री चाहते तो उद्योगों को भविष्य के लिए एक ठोस दिशानिर्देश दे सकते थे। ...
आखिर उद्योग जगत की इच्छा पूरी हो ही गई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने टैक्स के उस प्रावधान को वापस ले लिया, जिसे हटाने को लेकर पूरा उद्योग जगत रात दिन एक किए हुए था। वर्ष 2009-10 के बजट में फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) खत्म कर दिया गया है। लेकिन न्यूनतम वैकल्पिक कर की दर को बढ़ा दिया गया है। साथ ही कारपोरेट टैक्स में कंपनियों को वित्त मंत्री ने कोई राहत नहीं दी है। ...
चमड़ा उद्योग के लिए मशहूर औद्योगिक शहर कानपुर के उद्योगपति मनमोहन सरकार के बजट से काफी निराश हैं। वह यूपीए सरकार को उन वायदों की याद दिला रहे हैं जो उन्होंने चुनाव से पहले चमड़ा उद्योग को मंदी से उबारने के लिए किया था। ...
बिक्री में नरमी से परेशान वाहन कंपनियां चाहती हैं कि सरकार ने प्रोत्साहन पैकेजों के तहत उन्हें शुल्कों में जो रियायतें दे रखी है उन्हें आम बजट में जारी रखा जाए और ग्राहकों को वाहन खरीद के लिए कम दर पर कर्ज की व्यवस्था की जाए। ...
आर्थिक नरमी के दौर में कमाई के लिए इस समय ग्रामीण बाजार पर निर्भर रोजमर्रा के टिकाऊ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां चाहती हैं कि सरकार ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय बढ़ाने की योजनाओं पर ध्यान बनाए रखे ताकि उनके उत्पादन की खपत को बढ़ाने में मदद मिल सके। ...