अगले साल ममता को धन्यवाद देंगे प्रणब दा 
07 Jul 09, 3:30 am

मुश्किल वक्त में अपने ही तो काम आते हैं। प्रणब दादा का खजाना मुश्किल में है तो उनकी हमवतन ममता दीदी ही उनकी बड़ी मदद करेंगी। प्रणब दा ने बहुत सफाई के साथ विशालकाय रेल परिवहन क्षेत्र पर चुपचाप दस फीसदी का सेवा कर चिपका दिया है। अगर ममता दीदी न भड़कीं तो यह एक कदम खासा मोटा राजस्व ले आएगा। ..इसे कहते हैं मास्टर स्ट्रोक। ..लेकिन यह अकेला नहीं है, मैट की दर में बढ़ोतरी भी वित्त मंत्री के लिए बड़े काम की साबित होगी और साथ ही सेवा कर नियमों में किए गए कुछ छोटे बदलाव भी मोटा राजस्व ला सकते हैं। ...
मर्ज तो पकड़ लिया, दवा बताना भूल गए 
06 Jul 09, 10:10 am

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बीमारी का मर्ज तो पहचान लिया, लेकिन उसके लिए दवा नहीं दे सके। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और एम्स जैसे छह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोलने के लिए बजटीय आवंटन बढ़ा कर ये तो दिखा दिया कि सबके लिए स्वास्थ्य का लक्ष्य पाने का रास्ता क्या है, लेकिन उस रास्ते से चल कर मंजिल पाने के उपाय बताना भूल गए। ...
न्यूनतम मजदूरी बन सकती है टकराव की वजह 
06 Jul 09, 10:10 am

जिस नरेगा पर सवार होकर संप्रग केंद्र की सत्ता में दोबारा लौटा, बजट में उस पर मेहरबानी दिखाई गई है, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी से। नरेगा जैसी मांग आधारित कानूनी गारंटी वाली योजना में बजट आवंटन बढ़ा-चढ़ा कर बताने का कोई औचित्य नहीं है। न्यूनतम मजदूरी का राग आलाप कर केंद्र सरकार ने एक नया शिगूफा छेड़ दिया है, जिस पर कई राज्य आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। ...
आर्थिक ही नहीं, सार्थक पहल की भी जरूरत 
06 Jul 09, 9:50 am

बढ़ती आबादी की वजह से भयावह होती जा रही शहरों की तस्वीर बदलने के लिए केंद्र ने भले ही मोटी रकम घोषित की हो, लेकिन जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की जमीनी हकीकत भी उसके सामने है। पांच साल पहले शुरू किया गया केंद्र का यह महत्वाकांक्षी मिशन अभी तक मैदान नहीं मार पाया। जानकारों की मानें तो मिशन के तहत पंजीकृत तकरीबन पांच सौ परियोजनाओं में से तीन दर्जन के करीब ही अंजाम तक पहुंच पाई हैं। ...
चुनौतियां ज्यादा, कोशिशें नाकाफी 
06 Jul 09, 9:35 am

देश की लगभग आधी आबादी भले ही 25 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं की हो और उनके सामने पढ़ाई-लिखाई के बेहतर विकल्प भी कम हों, फिर भी सरकार ने बजट में इस बार भी काम चलाने भर की ही कोशिश की है। उच्च शिक्षा में दो हजार करोड़ रुपये का बजट बढ़ा कर पढ़ाई की राह आसान करने की पहल तो हुई है, लेकिन असल चुनौती माध्यमिक स्तर की शिक्षा में है। माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए लगभग दोगुने संसाधनों की जरूरत है, जबकि सरकार द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी हैं। ...