राजकोषीय घाटे की चिंता में बैठ गया बाजार   
 
 
06 Jul 09, 6:25 pm   

मुंबई। आम बजट पर पूंजी बाजार की प्रतिक्रिया खासी निराशाजनक रही। राजकोषीय घाटे के 14 साल में सर्वाधिक रहने के अनुमान ने निवेशकों की बजटीय उम्मीदों पर पानी फेर दिया और चौतरफा बिकवाली से बीएसई का सेंसेक्स 869 अंक लुढ़क गया।

रही सही कसर यूरोपीय बाजारों में आई गिरावट ने पूरी कर दी। सेंसेक्स के इतिहास में बजट के दिन की यह सबसे बड़ी गिरावट है। बीएसई का तीस शेयर आधारित सेंसेक्स लोकसभा में मुखर्जी का भाषण शुरू होने के साथ ही नीचे आना शुरू हो गया था। कारोबार के दौरान एक बार यह 14,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 13,959.44 तक लुढ़क गया। बाजार ने बाद में संभलने की कोशिश की पर अंत में सेंसेक्स 869.65 अंक की गिरावट के साथ 14,403.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में इस साल की भी यह सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सात जनवरी को सेंसेक्स 749 अंक टूटा था। नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 258.55 अंक टूटकर 4,130.70 पर बंद हुआ।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट पेश करते हुए कहा कि 2009-10 में राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 6.8 प्रतिशत हो सकता है। यह 1994 के बाद सर्वाधिक होगा। वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के बाद एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने अर्थव्यवस्था को उच्च वृद्धि दर की राह पर वापस लाने के लिए बड़े राजकोषीय घाटे का जोखिम उठाया है।

बाजार सूत्रों के अनुसार निवेशकों को बजटीय प्रस्तावों से निराशा हुई। शेयरों के साथ साथ रुपये और बांड की कीमतों में भी नरमी आई। बिकवाली दबाव का सर्वाधिक असर बैंकिंग क्षेत्र पर रहा। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 10 प्रतिशत तथा एचडीएफसी बैंक का शेयर 5.88 प्रतिशत टूटा। बाजार सूत्रों के अनुसार बजट में इस क्षेत्र को खोलने की कोई घोषणा नहीं की गई साथ ही उधारी योजना से बांड धारिता मूल्य कम होने की आशंका भी है।

इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो के शेयर भी टूटे। खंडवार सूचकांकों में केवल एफएमसीजी सूचकांक 0.97 प्रतिशत मजबूत हुआ।

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