अगले साल ममता को धन्यवाद देंगे प्रणब दा   
 
 
07 Jul 09, 3:30 am   

नई दिल्ली [अंशुमान तिवारी]। मुश्किल वक्त में अपने ही तो काम आते हैं। प्रणब दादा का खजाना मुश्किल में है तो उनकी हमवतन ममता दीदी ही उनकी बड़ी मदद करेंगी। प्रणब दा ने बहुत सफाई के साथ विशालकाय रेल परिवहन क्षेत्र पर चुपचाप दस फीसदी का सेवा कर चिपका दिया है। अगर ममता दीदी न भड़कीं तो यह एक कदम खासा मोटा राजस्व ले आएगा। ..इसे कहते हैं मास्टर स्ट्रोक। ..लेकिन यह अकेला नहीं है, मैट की दर में बढ़ोतरी भी वित्त मंत्री के लिए बड़े काम की साबित होगी और साथ ही सेवा कर नियमों में किए गए कुछ छोटे बदलाव भी मोटा राजस्व ला सकते हैं।

हर वित्त मंत्री अपने बजट में कुछ ऐसे दांव चलता है, जिनका असर एक वक्त के बाद पता चलता है। तजुर्बेकार प्रणब दा ने इस बजट में कई ऐसे दांव चले हैं। लेकिन इनके बारे में जानने से पहले कुछ अच्छी बातें हो जाएं जो बजट भाषण में नहीं बोली गईं। एक तो पिछले वित्त वर्ष के दौरान उत्पाद, सीमा शुल्क व सेवा कर दरों में जो कमी हुई थी वह अपरिवर्तित है और दूसरा, वित्त मंत्री ने आयकर में छूट, एफबीटी की समाप्ति और आयकर पर सरचार्ज खत्म करने के साथ संपत्ति कर से छूट की सीमा भी 15 लाख रुपये से बढ़ा कर 30 लाख कर दी है। यह कदम बड़ी संख्या में लोगों को राहत देगा और कर चोरी रोकेगा।

अब चलें बजट के छिपे हुए दांवों की तरफ। रेल परिवहन पर सेवा कर लगाना वित्त मंत्री का सबसे बड़ा दांव साबित हो सकता है और इसके विवादित होने की गुंजाइश भी है। क्योंकि ममता दीदी को शायद यह न भाए। अलबत्ता बजट में इसे शामिल कर लिया गया है। रेलवे ने पिछले साल के दौरान माल भाड़े से करीब 60,000 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। रेलवे से आने जाने वाली किन चीजों पर यह सेवा कर लगेगा इसकी तस्वीर तो अधिसूचना के बाद साफ होगी लेकिन यह तय है कि इससे राजस्व अच्छा मिलेगा। जाहिर है इसमें रेलवे की कंटेनर सेवा भी होगी, जिसका इस्तेमाल निजी क्षेत्र बड़े पैमाने पर करता है।

सेवा कर के मामले में वित्त मंत्री ने व्यापार सहयोगी सेवाओं की परिभाषा बदल दी है। इस बदलाव के बाद सेवा कर के तहत सिर्फ वही सेवाएं व्यापार सहयोगी होंगी जो कि उत्पाद शुल्क योग्य उत्पादों का निर्माण करती हों। यह बदलाव अल्कोहल और शराब उद्योग को तगड़ा झटका देगा जो बाटलिंग के लिए फ्रेंचाइजी संयंत्रों का इस्तेमाल करते हैं।

वित्त मंत्री ने उत्पाद शुल्क में भी कुछ महीन कारीगरी की है। मसलन चुपचाप कई उत्पादों को चार फीसदी के उत्पाद शुल्क की सूची से हटा कर आठ फीसदी की श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे एलपीजी गैस स्टोव, एमपी थ्री, एमपी फोर प्लेयर, प्लाईवुड, फाइबर बोर्ड जैसे कई अहम उत्पाद महंगे हो जाएंगे। सोने व चांदी के आभूषणों पर सीमा शुल्क में वृद्धि भी राजस्व लाने के मकसद से अहम हो सकती है।

इन कोशिशों के बाद अगर कुछ बचेगा तो उसकी भरपाई के लिए कंपनियों पर मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स है। जीरो टैक्स कंपनियों पर लगने वाला यह टैक्स काफी अच्छा राजस्व ला सकता है। यही वजह है कि एफबीटी हटाने और आयकर रियायत के बाद भी वित्त मंत्री प्रत्यक्ष कर में किसी तरह का नुकसान नहीं होने के प्रति आश्वस्त हैं।

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