
बॉक्स ऑफिस पर कोई रिश्तेदारी नहीं चलती। दर्शक रिश्तों की कद्र करते हैं, लेकिन ऐसे कद्रदान नहीं बनते कि बॉक्स आफिस पर जाकर पैसे खर्च करे। वाशु भगनानी ने अपने बेटे जैकी भगनानी की फिल्म के प्रचार के लिए हर कोशिश की। खूब जम कर प्रचार किया। विवाद आरंभ हुआ तो उसे भी तूल दिया। विभिन्न अवार्ड समारोहों और कार्यक्रमों में बेटे को नाचने के लिए भेजा, फिर भी दर्शक जैकी भगनानी की फिल्म देखने के लिए आतुर नहीं हुए। इस फिल्म का आरंभिक कलेक्शन पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं रहा। भूतनाथ की कामयाबी के बाद निर्देशक विवेक शर्मा के हाथ एक फ्लाप भी आ गयी। जोर लगा के हइया अपने बड़े उद्देश्य के बावजूद दर्शकों को नहीं लुभा सकी।
बॉक्स ऑफिस पर फ्लाप फिल्मों की गिनती बढ़ती जा रही है। ऐसा न हो कि यह साल अधिकतम फ्लाप के लिए याद रखा जाए। अभी हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। अगर निर्माता सुभाष घई की परितोष पेंटर निर्देशित पेइंग गेस्ट चल गयी तो स्थिति बदल सकती है।
-अजय ब्रह्मात्मज