अपनों का दर्द ज्यादा दर्द देता है जान को

अपनों का दर्द ज्यादा दर्द देता है जान को

मुंबई। तकलीफ और दर्द के बीच शूटिंग करना एक कलाकार के लिए कितना मुश्किल होता है, जॉन अब्राहम अच्छी तरह महसूस कर सकते हैं। आशाएं की शूटिंग उन्होंने ऐसे समय में पूरी की जब उनके माता-पिता अस्पताल में भर्ती थे।

दर्द भरे उन दिनों को याद करते हुए जॉन ने कहा कि परिवार में किसी के बीमार होने की सोच भी डरा देती है। मैं एक पारिवारिक व्यक्ति हूं। माता-पिता मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनके स्वास्थ्य की चिंता मुझे सबसे ज्यादा रहती है। जॉन की फिल्में भले ही बहुत अच्छा व्यवसाय न कर पा रही हों, लेकिन उनकी ब्रांड इमेज (व्यक्तित्व) बुलंदियों पर है।

वह कहते हैं कि आपकी सफलता और असफलता पर आपका ब्रांड निर्भर हो जाता है। लोग मुझ पर भरोसा करते हैं इसलिए मेरे कपड़ों पर भी उन्हें भरोसा है। खुद के साथ मैं अपने ब्रांड का भी ख्याल रखता हूं। फिल्मों की सफलता व असफलता को वह जीवन का हिस्सा मानते हैं। वह कहते हैं कि जिंदगी में यदि सब कुछ अच्छा-अच्छा ही होता रहे तो आप बोर हो जाएंगे। ऊंचे-नीचे वाले रास्ते जीवन में उत्साह बनाए रखते हैं।

फिल्मों की असफलता का मुख्य कारण जॉन उसके लिए किए गए दर्शकों का चुनाव मानते हैं। उन्हें उम्मीद है कि 20 जून को रिलीज होने वाली फिल्म आशाएं उनके तरह की फिल्म है और वह अच्छा करेगी।

हाल ही में वह मियामी से करण जौहर निर्मित व तरुण मनसुखानी निर्देशित फिल्म दोस्ताना की शूटिंग पूरी करके लौटे हैं।

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