
रामगोपाल वर्मा की नि:शब्द से लॉन्च होने वाली जिया खान ने फिल्म रिलीज होने से पहले कहा था, मैं यहां टिकने आई हूं। ऐसा कहते वक्त उनके चेहरे पर एक मुस्कान खिल आती थी। फिल्म रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर मिली असफलता से जिया के चेहरे की मुस्कान तो गायब हो गई, लेकिन उनका हौसला नहीं बदला। शायद इसीलिए उन्होंने कहा, मैं बिल्कुल निराश नहीं हूं। निश:ब्द कोई सामान्य फिल्म नहीं थी और इसका विषय बहुत ही कठिन था। हमारी टीम इस फिल्म से कोई बड़ी सफलता की उम्मीद भी नहीं कर रही थी। फिल्म ने समाज में एक बहस छेड़ी और यहीं आकर हमारा मकसद पूरा हो गया।
इतना ही नहीं, नि:शब्द के बाद जिया को जब संजय गढ़वी ने अपनी नई फिल्म का ऑफर दिया, तो इस बिंदास लड़की ने सीधे-सीधे उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया और वजह बताई, मुझे कहानी पसंद नहीं आई। वे कहती हैं, इस वक्त मैं बहुत सोच-समझकर फिल्में साइन करना चाहती हूं और किसी तरह की जल्दबाजी में काम नहीं करना चाहती। वे अपनी बात दोहराती हैं, मैं यहां बहुत लंबी पारी खेलने आई हूं।
यही नई पीढ़ी की हीरोइनों का अंदाज है, जो अपने रवैए को लेकर बहुत साफ सोच रखती हैं और किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। जिया खान की तरह ही कंगना भी इसी पीढ़ी की हीरोइन हैं और भविष्य को लेकर उनकी सोच बहुत साफ है। वे स्पष्ट करती हैं, मेरे पास हर रोज आठ-दस फिल्मों के ऑफर आ रहे हैं और मैं ज्यादातर ऑफर के लिए मना भी कर रही हूं। वे कहती हैं, इनमें कई ऑफर बड़ी फिल्मों के भी होते हैं, लेकिन मुझे बड़ी फिल्मों का लालच नहीं है। दरअसल, मेरे लिए दो बातें महत्वपूर्ण हैं। एक फिल्म की कहानी और दूसरी, मेरा रोल। मैं इसी ग्राउंड पर किसी फिल्म के लिए फैसला करती हूं और पसंद न आने पर मुझे किसी फिल्म के लिए मना करने में संकोच ही नहीं होता।
कंगना मानती हैं, फिल्म गैंगस्टर और वो लम्हे में निभाए गए रोल के बाद मेरे बारे में यह कहा जाने लगा कि मैं इसी तरह के रोल कर सकती हूं। मुझे यह बात अजीब लगती है। अभी मेरी शुरुआत है और मैं हर तरह के रोल करना चाहूंगी। कंगना नहीं मानतीं कि दो फिल्मों के बाद उन्हें भविष्य के लिए कोई प्रेशॅर महसूस होता है। वे कहती हैं, प्रेशॅर महसूस करूंगी, तो आगे के लिए नहीं सोच पाऊंगी। एक फिल्म के रिलीज होते ही मैं खुद को उससे अलग करने की कोशिश करती हूं। फिर मेरा फोकस आने वाली फिल्मों पर हो जाता है। कंगना कहती हैं, प्रोडयूसर अपनी फिल्म का ऑफर देते समय सिर्फ अपनी कॉमर्शियल चीजों को देखते हैं, लेकिन कलाकार के लिए इस तरह की बंदिश नहीं होनी चाहिए। वे उदाहरण देती हैं, यश चोपड़ा का बैनर हो या करण जौहर का, मैं उनकी फिल्मों में भी काम करने के लिए राजी हो सकती हूं, बशर्ते मेरे लिए उनकी फिल्मों में दमदार रोल हों।
मधुर भंडारकर की पिछली फिल्म ट्रैफिक सिग्नल की हीरोइन नीतू चंद्रा को प्रियदर्शन की फिल्म गरम मसाला से ब्रेक्र मिला था, लेकिन फिल्म ज्यादा नहीं चली और यह भी एक कारण है कि नीतू को उस फिल्म में बहुत ज्यादा नोटिस नहीं किया गया था। मधुर की फिल्म उनके लिए एक तरह से दोबारा लॉन्चिंग फिल्म साबित हुई, लेकिन नीतू इसलिए खुश हैं कि ट्रैफिक सिग्नल ने उन्हें एक नई पहचान दी। वे कहती हैं, अपनी पहली फिल्म गरम मसाला पर मुझे हमेशा गर्व रहेगा, क्योंकि इसी फिल्म की बदौलत मुझे मधुर की फिल्म में मौका मिला।
गरम मसाला में नीतू ने बहुत ही हॉट-शॉट किस्म का रोल किया था और टै्रफिक सिग्नल में वे एक नए रूप में नजर आई। नीतू के अनुसार, जब मधुर ने कहानी सुनाई थी, तब मुझे विश्वास हो गया था कि इस फिल्म में मुझे परफॉर्मेस दिखाने का अच्छा मौका मिलेगा और वैसा ही हुआ। टै्रफिक सिग्नल के बाद मुझे अपने करियर के लिए नया भरोसा मिला है और अब मैं अपनी नई फिल्मों को लेकर बहुत सजग हूं। मैं अब कम, लेकिन उन फिल्मों में ही काम करना चाहूंगी, जिनमें मेरे लिए कोई मौका होगा। वे अपनी नई फिल्मों के बारे में अभी नहीं बतातीं, अभी बातचीत चल रही है। फॉर्मल अॅनाउंसमेंट होने तक मैं कुछ नहीं कहना चाहती। नीतू भविष्य को लेकर एक बड़ी बात कहती हैं, मधुर की ट्रैफिक सिग्नल के बाद मुझे महसूस होता है कि अब परफॉर्मेस ओरिएंटेड रोल ही करने चाहिए।
कैटरीना कैफ की पहली पहचान हमेशा सलमान खान की गर्लफ्रेंड के रूप में ही रही है। हाल ही में रिलीज हुई विपुल शाह की फिल्म नमस्ते लंदन में ैटरीना कैफ की एक्टिंग को सराहा गया और इसीलिए फिल्म समीक्षकों ने उन्हें संभावनाओं वाली हीरोइनों की लिस्ट में शामिल कर लिया। उल्लेखनीय है कि कैटरीना कैफ ने इससे पहले राजकंवर की फिल्म हमको दीवाना कर गए में भी अच्छा काम किया था, लेकिन वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। नमस्ते लंदन की सफलता ने कैटरीना को खुश होने का मौका दे दिया। कैटरीना इस बात से दुखी हो जाती हैं कि सलमान के साथ उनके रिश्तों को लेकर मीडिया में बहुत कुछछपता रहता है। वे स्पष्ट कहती हैं, मैं अपनी निजी जिंदगी को मीडिया के साथ नहीं बांटना चाहती और मीडिया से सिर्फ अपनी फिल्मों को लेकर ही बात करना चाहती हूं। कैटरीना फिल्मों के बारे में कहती हैं, मैं यहां पैदा नहीं हुई हूं और सिर्फ इस उम्मीद के साथ इंडिया आई हूं कि मुझे यहां अच्छा काम मिलेगा। वे आगे कहती हैं, मुझे ऐसा आभास था कि शुरू में यहां काम मिलने में परेशानी होगी और मेरे पास अपनी पसंद की फिल्मों में काम करने का मौका कम ही होगा, लेकिन दो साल के अनुभव के बाद अब मैं यह कह सकती हूं कि मुझे बहुत अच्छे मौके मिले हैं, इसीलिए मैं अब अपने करियर को लेकर बहुत गंभीरता से सोचती हूं।
कैटरीना के अनुसार, मैं यहां बहुत नई जरूर हूं, लेकिन इतना समझती हूं कि किसी भी कलाकार को अपनी क्षमता का अहसास तभी होगा, जब उसे मौका मिलेगा। मुझे जब भी मौका मिला, अच्छा काम करने की कोशिश की। वे आगे कहती हैं, मुझे ग्लैमर गर्ल कहा जाता है। इस बात से मुझे दुख नहीं होता, लेकिन आने वाले वक्त में अपनी फिल्मों से मैं साबित करना चाहती हूं कि मौका मिलने पर मैं परफॉर्मेस भी दे सकती हूं।
इन हीरोइनों के अलावा, रामगोपाल वर्मा की खोज निशा कोठारी भी संभावनाओं वाली हीरोइन मानी जाती हैं। रामू ने अपनी शोले में उन्हें बसंती वाला रोल दिया है और निशा इसे अपने लिए बड़ा मौका मानती हैं। कश्मीर समस्या पर आधारित फिल्म यहां से लॉन्च हुई मिनीषा लांबा ने मधुर भंडारकर की कॉरपोरेट में अच्छा काम किया और वे भी इसी लिस्ट में शामिल हैं। मिनीषा खुद को लंबी दौड़ का हिस्सा मानती हैं और शायद इसीलिए कहती हैं, यहां धीमी गति से, लेकिन मजबूती के साथ आगे बढ़ने वाले ही भविष्य बना सकते हैं और मैं यही चाहती हूं। दिल्ली से मॉडलिंग के रास्ते फिल्मों में कदम रखने वाली मीनिषा को अपनी पहचान बनाने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगा। उन्हें अपने टैलॅन्ट पर भरोसा है और इसीलिए वे मानती भी हैं कि टैलॅन्ट ही हर सफलता का आधार होती है।
इन सभी हीरोइनों के बारे में कुछ और दिलचस्प समानताएं भी सामने आती हैं। एक समानता तो यही है कि कोई भी लड़की किसी फिल्मी परिवार से सीधे तौर पर कोई वास्ता नहीं रखती या यूं कहा जाए कि किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आई। सच तो यह है कि अपनी पोजिशन बनाने के लिए इन सभी ने संघर्ष का रास्ता अपनाया और सफलता की राह उन्हें मिली। दूसरी समानता यह रही कि सभी आजाद खयालों की हैं और किसी को एक्सपोजर के नाम पर बहुत परहेज नहीं है। कहानी की जरूरत के हिसाब से इन सभी को नरमदिल होने में देर नहीं लगती और ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो इसी नरमदिली को इनकी तरक्की से जोड़ते हैं। याद कीजिए, नेहा धूपिया का बयान, यहां शाहरुख बिकते हैं या फिर सेक्स। गौरतलब है कि बॉक्स ऑफिस पर शाहरुख खान की फिल्में भी फ्लॉप हो जाती हैं, लेकिन हां, सेक्स और ग्लैमर जरूर और जरूर चलता है।