
-साक्षी
अब न तो कोई उन्हें छोटे नवाब कहता है और न ही उनके नखरों की बातें की जाती हैं। लगता है, समय के साथ सैफ अली खान व्यक्ति के रूप में मैच्योर हो गए हैं। निजी जिंदगी की उथल-पुथल और करियर में मिली सफलता की हलचल ने उन्हें थोड़ा शांत और गंभीर बना दिया है। वे मजाक में कहते भी हैं, कई बार लगता है कि मैं पापा जैसा होता जा रहा हूं। मैं बड़ी-बड़ी बातें तो नहीं करने लगा हूं। जिंदगी और रिश्तों को लेकर वे दार्शनिक मुद्रा अपना लेते हैं। ऐसी बातें करने लगते हैं, मानो अपने साथ घटी घटनाओं और उनसे पैदा हुई स्थितियों को उन्होंने अपना लिया हो। कोई दुख नहीं है, लेकिन जीवन में उल्लास की कमी है। यह उनके व्यवहार, हाव-भाव और प्रतिक्रियाओं से जाहिर होता है। इसमें फिल्मी करियर में आए उतार-चढ़ाव का अनुभव भी हो सकता है। पिछले साल ओमकारा में लंगड़ा त्यागी की भूमिका के लिए हर पॉपुलर अवार्ड पा चुके सैफ अली खान का करियर अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उसके पहले बीइंग साइरस जैसी प्रयोगशील फिल्म में काम करने के लिए भी उनकी तारीफ हुई थी। हालांकि इस साल आई विधु विनोद चोपड़ा की एकलव्य नहीं चली, लेकिन सैफ के करियर पर इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। लंबे समय से लटकी नहले पे दहला इस साल रिलीज हुई, तो दर्शक देखने ही नहीं गए।
सैफ फिल्म तारा रम पम में बिल्कुल अलग भूमिका में नजर आएंगे। यशराज फिल्म्स की सिद्धार्थ आनंद निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने कार रेसर की भूमिका निभाई है, जो अपनी जिंदगी में सफलता के बाद मुश्किल स्थितियों से गुजरता है और फिर कैसे परिवार की मदद से पुन: विजयी होता है। इमोशनल और कार रेस के थ्रिल से भरी यह फिल्म अलग अंदाज की है। तारा रम पम में सैफ फिर से रानी मुखर्जी के साथ नजर जाएंगे। हम लोगों को याद दिला दें कि इस जोड़ी की पिछली फिल्म हम तुम काफी सफल रही थी और इसी फिल्म के लिए सैफ को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।
बहरहाल, रानी मुखर्जी के साथ अपनी केमिस्ट्री के बारे में वे जानते हैं और बताते हैं, कोई जरूरी नहीं है कि स्क्रीन केमिस्ट्री के लिए दोनों कलाकार बहुत अच्छे दोस्त या करीबी हों, क्योंकि कई बार हमने देखा है कि वास्तविक जिंदगी के प्रेमी-पे्रमिका पर्दे पर दर्शकों को पसंद नहीं आते। इसके विपरीत कई जोडि़यां पर्दे पर चमत्कार करती हैं। रानी मुखर्जी की बेहतर अदाकारी के कारण सैफ एक चुनौती महसूस करते हैं और इसलिए थोड़ा चौकन्ना रहते हैं। इसके बावजूद वे रानी मुखर्जी की तारीफ करते नहीं थकते। वे बहुत अच्छी एक्ट्रेस हैं। कहते हैं सैफ। तारा रम पम में सैफ दो बच्चों के साथ नजर आएंगे। कहा जाता है कि बच्चों के साथ काम करना मुश्किल होता है, लेकिन सैफ का अनुभव उल्टा रहा। उन्होंने इन बच्चों से काम के प्रति लगाव से सबक लिया। एक दिन तबियत खराब होने के कारण वे शूटिंग के मूड में नहीं थे, लेकिन उन्होंने देखा कि बाल कलाकार अली बीमार होने के बावजूद अपना काम कर रहा है। उसके इस लगाव ने भी सैफ को प्रेरित किया।
फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के साथ सैफ सलाम नमस्ते कर चुके हैं। वे मानते हैं, सिद्धार्थ ने इस बार खुद के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर ली है। तारा रम पम का विषय नया है और इस तरह की फिल्म पहली बार हिंदी फिल्मों के दर्शक देखेंगे। दो फिल्मों के बाद सिद्धार्थ आनंद पर सैफ अली खान को इतना भरोसा हो गया है कि वे उनकी अगली फिल्म बगैर स्क्रिप्ट सुने भी कर सकते हैं। वे कहते हैं, हम एक्टर अपने डायरेक्टर पर भरोसा करने के बाद ही ग्रो करते हैं। डायरेक्टर हमारी क्षमताओं को जानते हैं और हमारी संभावनाएं पहचानते हैं। आगे सैफ मानते हैं, यशराज बैनर की फिल्म तारा रम पम एक पारिवारिक कहानी है। मुझे उम्मीद है, इसकी कहानी घर-परिवार के सभी सदस्य को अच्छी लगेगी।