
महानायक अमिताभ बच्चन के मेकअपमैन हैं दीपक सावंत। इन दोनों का साथ 35 सालों का है। इतने वर्षो की जुगलबंदी कोई हंसी-खेल नहीं है। दीपक बिग बी के रील और रिअल लाइफ केहर अच्छे-बुरे रंग के साक्षी हैं। दीपक आज भी उनके साथ हैं। वे हमें बता रहे हैं बिग बी के बारे में..।
मेरी पृष्ठभूमि
मेकअप की कला मुझे विरासत में मिली। मैं अपने जमाने के मशहूर मेकअपमैन दत्ता सावंत का बेटा हूं। मेरा पूरा परिवार इसी क्षेत्र में है। मेरा भाई अशोक अभिषेक बच्चन के और दूसरा भाई तुषार के मेकअपमैन हैं। मेरी पत्नी और बेटी भी लोगों को सुंदर बनाने का काम करती हैं। अपने पिता की खस्ता आर्थिक स्थिति को देखते हुए मैंने कभी मेकअपमैन बनने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन फैक्टरी की नौकरी छूटने के बाद मैं फिल्म लाइन में आ गया। मेरे करियर की शुरुआत राजेश खन्ना और दिलीप कुमार के साथ हुई थी।
पहली मुलाकात
अमित जी से मेरी पहली मुलाकात उस वक्त हुई, जब वे लगातार असफल हो रहे थे और मैं मेकअपमैन बनने की कोशिश में था। वह रास्ते का पत्थर फिल्म की शूटिंग थी। अमित जी को मेरा काम करने का तरीका पसंद आया। मैंने उनसे कहा, मैं आपके साथ काम करना चाहता हूं। क्या आप मुझे अपना पर्सनल मेकअपमैन बनाएंगे? उन्होंने कहा, मैं देखता हूं। उस वक्त अमित जी पर्सनल मेकअपमैन रखने की पोजिशन में नहीं थे, लेकिन जंजीर हिट हुई और उनकी मजबूर और जमीर की शूटिंग शुरू हुई। उसी के बाद उन्होंने मुझे अपना पर्सनल मेकअपमैन बना लिया।
मल्टीफेसेज हैं वे
सारी दुनिया जानती है कि वे इस सदी के महानायक हैं, लेकिन एक मेकअपमैन के नजरिए से मैं कह सकता हूं कि वे मल्टीफेसेज हैं। पिछले 35-37 सालों में अनेक ऐसे मौके आए हैं, जब मुझे उन्हें चैलेंजिंग लुक देने का मौका मिला। कुछ अरसा पहले आई फिल्म ब्लैक में उन्हें बूढ़े प्रोफेसर का लुक देना था। अदालत में उनका डबल रोल था, जिसमें एक ही समय में जवान और बूढे़ आदमी के मेकअप में वे दिखे। खुदा गवाह में पठान और शहंशाह में उनका यूनीक चरित्र था। सालों से उनका मेकअप करते हुए पाया कि सब्र करना उन्हें खूब आता है। चाहे विग या दाढ़ी-मूंछें लगानी हो या फिर मेकअप की परतें चढ़ाना हो, वे खुद को मेकअपमैन के हवाले कर देते हैं।
समर्पित अभिनेता
अपने काम के प्रति अमित जी का वादा चौंकाने वाला होता है। उनका एक उसूल है, जब वे किसी फिल्म को साइन कर लेते हैं, तो फिर कुछ भी हो जाए, वे उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। काला पत्थर की शूटिंग के दौरान वे काफी बीमार थे, लेकिन उन्होंने उस हालत में भी सीन पूरे किए। कुछ साल पहले आई फिल्म दीवार की शूटिंग में सुरंग के दृश्य थे और वहां उन्हें अस्थमा का अटैक हुआ था, लेकिन वे डटे रहे। वे अपनी तकलीफों का ढिंढोरा नहीं पीटते। आज भी कई बार उनकी तबियत डल होती है। कमर दर्द सताता है, लेकिन सेट पर आते ही वे चार्जअप हो जाते हैं। एक महान अभिनेता होने के बावजूद एक बच्चे की तरह सीखने की जिज्ञासा उनमें आज भी बरकरार है।
अमित जी से रिश्ता
वे मुझसे आठ साल बड़े हैं। लोग अगर पूछें कि मेरा उनसे क्या रिश्ता है, तो मैं यही कहूंगा कि मैं उनका मेकअपमैन हूं और यही बने रहना चाहता हूं। मैं अपनी औकात कैसे भूल सकता हूं। उन्होंने हर मुसीबत में मेरा साथ दिया है। मेरे भाई की बीमारी के उस दौर में उन्होंने ही अपने डॉक्टर्स को फोन करके उसे नानावती से बॉम्बे हॉस्पिटल में शिफ्ट करवाया। वे निरंतर डॉक्टर्स के संपर्क में रहे। मेरे पिता के अवसान पर वे भी काफी भावुक हो उठे थे। उन्होंने उस दिन की शूटिंग कैंसिल करवा कर मुझे काफी ढांढस बंधाया था। वैसे, मेरे घर जब भी सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है, वे जरूर पधारते हैं।
दूरी का दौर
1979 में एक वक्त ऐसा भी आया, जब अमित जी के मन में मुझको लेकर गलतफहमी पैदा हो गई। एक दिन उन्होंने मुझे बुलाकर कहा, हम कुछ समय के लिए अलग हो जाते हैं। मैं तो सन्न रह गया। उस बीच के 3-4 साल मैंने स्मिता पाटिल और चंकी पांडे का मेकअप किया, लेकिन एक दिन जादूगर की शूटिंग के दौरान उनका बुलावा आया। मैं जब उनसे मिलने गया, तो वे बोले, दीपक तुम कौन-सा मेकअप करते हो? मैंने कहा, सर, सीन व रिक्वायरमेंट के हिसाब से मेकअप करता हूं। जब सीन इमोशनल हो तो डल, फाइट सीक्वेंस हो, तो रफ और रोमांटिक हो, तो फ्रेश टच देता हूं। मैं सेट पर सीन की रिक्वायरमेंट जानता हूं। वे बोले, अच्छा। मैंने कहा, हां सर, मैं तो हमेशा ऐसा ही करता आया हूं। अमित जी का वह दोबारा बुलाना मेरे लिए गर्व की बात थी। ऐसा होने से मेरे करियर पर लगा दाग धुल गया। उसके बाद मेरे निर्माण में बनी मराठी फिल्म अक्का और भोजपुरी की गंगा और गंगोत्री में अभिनय करके उन्होंने मुझे धन्य कर दिया।
प्रस्तुति : रेखा खान