
कह सकते हैं कि अभिषेक बच्चन के करियर पर थ्री-डी इफेक्ट्स की शुरुआत फिल्म द्रोण से होगी। वैसे, यह संयोग ही है कि उनकी आने वाली तीनों फिल्मों के टाइटिल डी अक्षर से आरंभ होते हैं। वे द्रोण, दोस्ताना और दिल्ली-6 में विभिन्न किरदारों में दिखेंगे। द्रोण उनके बचपन के दोस्त गोल्डी बहल की फिल्म है। इस फंतासी और ऐडवेंचर फिल्म में अभिषेक द्रोण की शीर्षक भूमिका निभा रहे हैं। पिछले उनसे मुलाकात हुई, तो द्रोण के साथ ही अनफॉरगेटेबल टुअॅर और बाकी बातों पर भी चर्चा हुई। अभिषेक से पहला सवाल यही हुआ कि द्रोण रेगुलर फिल्म नहीं लग रही है। वे इसकी अवधारणा के बारे में बताते हैं, यह अच्छे और बुरे के सतत संघर्ष की फिल्म है। सागर मंथन के बाद देवताओं ने एक साधु को अमृत सौंपा था। जब साधु को लगा कि असुर करीब आ रहे हैं और वे उससे अमृत छीन लेंगे, तो उसने अमृत घट का राज प्रतापगढ़ के राजा वीरभद्र सिंह को बताया और उनसे सौगंध ली कि वे अमृत की रक्षा करेंगे। इसी कारण उन्हें द्रोण की उपाधि दी गई। मैं इस फिल्म में आदित्य की भूमिका निभा रहा हूं। मैं वीरभद्र सिंह के वंश का हूं। इस पीढ़ी में मेरा दायित्व है कि मैं अमृत की रक्षा करूं, इसलिए मुझे द्रोण की उपाधि दी जाती है।
आदित्य इन चीजों से अनजान सामान्य जिंदगी जी रहा होता है, लेकिन अचानक उसकी जिंदगी बदल जाती है। इस तरह से एक ही किरदार खास परिस्थिति में बदल जाता है, यानी डबल रोल है इसमें अभिषेक का? वे स्पष्ट करते हैं, हां, मैं पहले सामान्य युवक आदित्य हूं, लेकिन द्रोण की उपाधि मिलते ही मेरी जिंदगी बदल जाती है और मेरा दायित्व भी बढ़ जाता है। अब मुझे अपनी मां के साथ अमृत की रक्षा करनी है। देवताओं को दिए गए सौगंध की लाज रखनी है और साथ ही असुरों को भी हराना है।
फिल्म को लेकर कहा जा रहा है कि यह अभिषेक की सुपर हीरो वाली फिल्म है? वे इस बारे में अपनी बात रखते हैं, मालूम नहीं, कहां से यह बात फैली है! यह सुपर हीरो वाली फिल्म नहीं है। द्रोण के पास कोई सुपरपॉवर नहीं है। वह एक शक्तिशाली राजा जरूर है। उसकी शक्तियां अलौकिक लग सकती हैं, लेकिन वह कहीं से भी सुपर हीरो नहीं कहा जा सकता! अभिषेक फिल्म की योजना बनने के बारे में बताते हैं, गोल्डी पहले किसी और विषय पर फिल्म लिख रहे थे। वह क्राइम थ्रिलर थी। उन्हें अचानक इस विषय का खयाल आया। उन्होंने गुरु की शूटिंग के दौरान मुझसे बात की और कहा कि बड़े पैमाने पर वे एक फिल्म की योजना बना रहे हैं। मैंने उनसे इतना ही कहा कि अगर आप अपने विषय को लेकर आश्वस्त हैं, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। गोल्डी के साथ मेरा ऐसा ही रिश्ता है। मुझे भी लगा कि मैं द्रोण करूं या न करूं, लेकिन मैं इसे देखना चाहूंगा। इस विषय ने मुझे इतना आकर्षित किया कि गोल्डी को तुरंत हां कह दिया। निजी तौर पर अभिषेक के लिए द्रोण का अनुभव कैसा रहा? यह रेगुलर किस्म की फिल्म नहीं है और न ही उनका किरदार हिंदी फिल्मों का रेगुलर हीरो जैसा है? वे कहते हैं, मेरे लिए तो यह किरदार बहुत ही अलग है। मैंने द्रोण जैसी कोई फिल्म पहले नहीं की है। मुझे नहीं लगता किजल्दी कोई दूसरा मौका भी मिलेगा! यह फिल्म बड़े पैमाने पर बनी है। मेरी अभी तक की सबसे महंगी फिल्म है द्रोण। इसमें मेरा लुक और मेरा कैरेक्टर एकदम नया है। यह अपनी तरह की पहली फिल्म है और यही सबसे बड़ी चुनौती रही। मेरे लिए कोई रेफरेंस प्वॉइंट नहीं था।
इसमें काम करने के वक्त किस तरह की चुनौतियां या मुश्किलें आई, अभिषेक इस बारे में भी बात करते हैं, दरअसल, बड़ी फिल्म की मुश्किलें भी बड़ी होती हैं। अगर हम बड़ा काम करते हैं, तो उसकी जांच होती रहती है। सच तो यह है कि हमें अपनी मेहनत और लगन से वह अर्जित करना पड़ता है। मुश्किलें स्वाभाविक रूप से आती हैं। प्राग में ऐसी बर्फ गिरी की दो दिनों तक हम बैठे रहे। बीकानेर जैसी जगह में ऐसी बारिश हुई कि सेट बह गया। नामीबिया में शूटिंग कर रहे थे, तो चक्रवात आ गया। हमने तो सोचा भी नहीं था कि ऐसा कुछ होगा!
चर्चा है कि फिल्म में अंडरवॉटर स्टंट भी किया है अभिषेक ने? वे स्वीकारते हैं, हां और वह बहुत खतरनाक था। मुझे बगैर ऑक्सीजन मास्क के पानी में रहना था। स्टंट के समय अपनी सांसें रोक कर रखनी थी। अगर ऑक्सीजन की अचानक जरूरत महसूस हो, तो सहायता के लिए एक आदमी रहता था। बीस फीट गहरे पानी के टैंक में इसकी शूटिंग हुई थी। पहले दिन तो पानी के दबाव के कारण नाक से खून बहने लगा था। रोज आठ से नौ घंटे पानी में शूटिंग करनी पड़ी थी। मैं उस कठिन शूटिंग को नहीं भूल सकता। उसका अलग रोमांच था। अभिषेक एक सुपर स्टार के बेटे होने के साथ दुनिया की सबसे खूबसूरत इंटरनेशनल आइकॉन के पति भी हैं। इनके कारण वे कोई दबाव या चुनौती महसूस करते हैं? वे कहते हैं, बिल्कुल नहीं। मैं ऐसा कुछ महसूस नहीं करता। अगर इस बारे में सोचने लगूं, तो नार्मल जिंदगी तबाह कर लूंगा। मुझे अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करते हुए काम करना चाहिए और परिणाम दर्शकों पर छोड़ देना चाहिए। मैं वही करता हूं। अब पिता अमिताभ बच्चन से अभिषेक की तुलना नहीं की जाती। क्या उन्होंने अपनी जगह पा ली है? वे कहते हैं, मैं नहीं कह सकता कि मेरी अब तक कोई जगह बन पाई है या नहीं! लोग पहले पापा से मेरी तुलना करते थे, जो नेचुरल था। बाद में लोगों को लगा कि मेरी शैली अलग है। अगर कोई समानता दिखती है, तो भी मैं शर्मिदा नहीं हूं। मैं उनका बेटा हूं। उनके गुण मुझ में आने ही चाहिए। कोई कहता है कि मैं अमिताभ बच्चन की तरह ऐक्टिंग करता हूं, तो मेरे लिए यह बड़ी बात है। लोग अमित जी को ऐक्टर के रूप में देखें और फिर उनसे मेरी तुलना का महत्व समझें!
-अजय ब्रह्मात्मज