
कान में मधुर-रस घोलने वाली स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिन प्रत्येक भारतवासी को जश्न मनाने का मौका देता है। इस दिन भारतवासी स्वर कोकिला लता मंगेशकर के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर करते हैं, क्योंकि उनकी कर्णप्रिय आवाज के रूप में भारत को एक ऐसी धरोहर मिली है, जो न केवल अमूल्य है, बल्कि अतुलनीय भी है। कई उभरते सिंगरों की प्रेरणास्रोत लता मंगेशकर के जन्मदिन 28 सितंबर पर गायक सोनू निगम अपनी आदरणीया दीदी को बधाई दे रहे हैं।
सादगी की प्रतिमूर्ति : उम्र के इस पड़ाव पर भी दो चोटी बांधने वाली लता दीदी सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। किसी-भी तुलना से परे हैं वे। मुझे याद है। मैं एक रेडियो चैनल के लिए उनका इंटरव्यू करने वाला था। मैंने उनसे बात की और इस बारे में उनसे बताया। उन्होंने तुरंत हामी भर दी। उन्होंने कहा, ठीक है, मैं आती हूं। इतनी सरलता शायद ही किसी और सिंगर में हो! लगभग साढ़े तीन घंटे सफर करने के बाद वे रेडियो स्टेशन पहुंचीं। तब पहली बार लता दीदी से मैंने ढेर सारी बातें की थीं। उन्होंने अपने बचपन में चॉकलेट खाने की आदतों से लेकर संगीत के प्रति अपने लगाव आदि के बारे में खुलकर बात की। मैंने उस इंटरव्यू के दौरान यह जाना कि उनमें आज भी एक छोटा बच्चा छिपा हुआ है।
नम्र और पूजनीय : लता दीदी को जितनी प्रसिद्धि मिली है, उसे वे भगवान का आशीर्वाद मानती हैं। उन्होंने कहा था कि जो सब मुझे मिला है, उनमें मेरा कोई योगदान नहीं है। सब भगवान ने मुझे दिया है, मैंने कुछ नहीं किया है। दीदी बेहद नम्र हैं, इसीलिए लोग उन्हें इतना प्यार करते हैं। नि:संदेह अपनी प्रतिभा के बल पर ही उन्होंने इतनी ऊंचाई छूई है। आज वे कई लोगों के लिए पूजनीय हैं। मैं उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। उनकी प्रेरणा से ही मैंने गायक बनने के बारे में सोचा। जिस तरह एक पुजारी भगवान की पूजा करते हुए अपना सारा जीवन व्यतीत कर देता है, ठीक उसी तरह दीदी संगीत की पूजा करती हैं। संगीत से वे इतना प्यार करती हैं कि आज वे स्वयं संगीत की देवी बन गई हैं।
शर्मीली दीदी : दीदी बेहद शर्मीली हैं। वे मीडिया के सामने हमेशा नहीं आती हैं। दूसरे कलाकारों की तरह अपनी बातें खुलकर वे सबके सामाने नहीं रखतीं। उनके करीबी उन्हें बेहद शरारती और चंचल बताते हैं। वैसे, एक बात सच है कि दीदी का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। उनकी अपनी एक सीमित दुनिया है, जिसमें वे रहना पसंद करती हैं।
मेरी प्रेरणास्रोत : संगीत के प्रति खुद को समर्पित करने की प्रेरणा मुझे दीदी से ही मिली। इंडस्ट्री में आने के बाद कुछ समारोहों में मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। उनसे मैं जब-जब मिलता हूं, एक अजीब-सी ऊर्जा मिलती है, जो मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। जब मुझे पता चला कि वन टू का फोर का गीत खामोशियां गुनगुनाने लगीं.. दीदी के साथ गाना है, तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि उनके साथ मेरी आवाज एक ही गाने में गूंजने वाली है। इस गीत की रिकॉर्डिग का वह दिन मेरे लिए एक ऐतिहासिक दिन था।
ढेर सारी बधाईयां : दीदी जानती हैं कि मैं उन्हें कितना प्यार करता हूं। वे मेरे लिए ही नहीं, संगीत-जगत से जुड़े सभी लोगों के लिए अमूल्य हैं। फिल्म संगीत में क्रांति लाने वाली लता दीदी को जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां। आपका संगीतमय सफर हमारे लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगा। आपका आशीर्वाद और मार्गदर्शन इसी तरह मिलता रहे।
-एस ए