दर्शकों ने हमारी सुन ली अभिषेक

दर्शकों ने हमारी सुन ली अभिषेक

उम्मीदें तो हर फिल्म से होती ही हैं, लेकिन ये कभी-कभी ही कामयाब होती हैं। दोस्ताना से बंधी अभिषेक बच्चन की उम्मीदें सही साबित हुई। फिल्म महानगरों में अच्छी चल रही है। उनका काम भी पसंद किया जा रहा है। साल में एक सफल फिल्म आ जाए, तो स्टारडम बरकरार रहता है। कहा जा सकता है कि अभिषेक का डगमगाता करियर फिर से रास्ते पर आ गया है। फिल्म दोस्ताना के चलने से वे बेहद खुश हैं।

दोस्ताना की कामयाबी की एक बड़ी वजह अभिषेक और जॉन अब्राहम के बीच की केमिस्ट्री मानी जा रही है। इस बारे में वे बताते हैं, जॉन से मेरी दोस्ती धूम के सेट पर हुई थी। तब से विभिन्न अवसरों पर हमलोग मिलते रहे हैं और हमारा कम्युनिकेशन बना रहा है। हम दोनों एक ही स्कूल बॉम्बे स्कॉटिश में पढ़े हैं। वहां जॉन मेरे सीनियर थे। हम दोनों यही मना रहे थे कि धूम की कामयाबी रिपीट हो जाए, तो मजा आ जाए। लगता है दर्शकों ने हम दोनों की सुन ली। हम दोनों के बीच जो कम्फर्ट लेवॅल है, उसकी वजह से फिल्म अच्छी बनी है। हम इस फिराक में नहीं थे कि दूसरे का सीन चुरा लें या उस पर हावी हो जाएं! असल चीज होती है कि सामने वाले पर आपका विश्वास है कि नहीं! अगर बेसिक विश्वास नहीं होगा, तो दस तरह की दिक्कतें होंगी।

दोस्ताना में खुद को समलैंगिक दिखने और दिखाने में अभिषेक को दिक्कत नहीं हुई। फिल्म की कामयाबी के बाद वे राज खोलते हैं, जॉन और मैंने सोचा था कि यदि हमलोग अपने किरदारों को लेकर थोड़े भी झिझक में रहें या कहीं कुछ बचने-संभालने की कोशिश की, तो कैमरा उसे पकड़ लेगा। वैसी स्थिति में दर्शकों को मजा नहीं आएगा और किरदार भी नकली लगेंगे। हम दोनों ने तय किया कि पूरे दिल से किरदारों को निभाना है। हम किरदारों में घुस गए और हां, हम समलैंगिक होने का झूठ गढ़ रहे थे, इसलिए कोई चिंता नहीं थी कि हमारे बारे में प्रशंसकों की क्या धारणा बनेगी।

दोस्ताना की कामयाबी ने फिर से साबित किया कि अभिषेक खिलंदड़ मिजाज वाले कैरेक्टर में जंचते हैं। अगर उन्हें हल्की-फुल्की कॉमेडी के सिचुएशंस दिए जाएं, तो वे निखरकर सामने आएंगे। इस निरीक्षण पर चौंकते हुए अभिषेक कहते हैं, अगर ऐसी बात है, तो मैं आगे कोशिश करूंगा कि साल में एक फिल्म तो ऐसी कर ही लूं। यहां मैं कहना चाहूंगा कि फिल्म चलती है, तो ऐक्टर फिल्म के साथ-साथ चलते हैं। मेरी सरकार राज चली। उसमें तो मेरा इंटेंस कैरेक्टर था। दोस्ताना कॉमेडी है। द्रोण नहीं चली, इसलिए मेरा कैरेक्टर लोगों को पसंद नहीं आया। क्या द्रोण की असफलता के बारे में कुछ विचार किया आपने? अभिषेक बेहिचक बताते हैं, हमलोग स्पेशल इफेक्ट को लेकर मुग्ध हो गए। पटकथा में कमी रह गई। दर्शकों को उम्मीद थी कि फिल्म का हीरो द्रोण कुछ करेगा, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। मूवमेंट और ऐक्शन की कमी रह गई। आगे खयाल रखेंगे इस बात का। आने वाली फिल्म दिल्ली-6 के बारे में अभिषेक जानकारी देते हैं, यह दिल्ली के चांदनी चौक की कहानी है। विदेश में जन्मा-पला और बढ़ा एक लड़का वहां रहने आता है। उसी के अनुभव और रिएक्शंस पर केंद्रित है यह फिल्म।

मणिरत्नम् की फिल्म के बारे में कुछ भी बताने से साफ मना करते हैं अभिषेक। वे इतना ही बताते हैं, फिल्म का नाम रावण नहीं है और हमलोग केरल के जंगलों में शूटिंग कर रहे हैं।

-अजय ब्रह्मात्मज

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