सब मुझ पर हंसते थे: राहुल लोहानी

सब मुझ पर हंसते थे: राहुल लोहानी

युवा अभिनेता राहुल लोहानी धारावाहिक बालिका वधू से हाल ही में जुड़े हैं। वे इस लोकप्रिय सीरियल में गहना के म्यूजिक टीचर निरंजन की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले राहुल कहता है दिल, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, जब लव हुआ, राखी और मोहे रंग दे सीरियल में दिखे। बालिका वधू से जुड़कर वे बेहद खुश हैं। वे हमारे साथ अपनी खुशियां बांट रहे हैं..।

खुश होना लाजमी है: बालिका वधू इस समय छोटे पर्दे का सबसे लोकप्रिय सीरियल है। इससे जुड़ कर मेरा खुश होना लाजमी है। मुझसे पहले इस भूमिका के लिए बहुत सारे लोगों का ऑडिशन लिया गया था, लेकिन प्रोडक्शन हाउस को कोई जंचा नहीं। मैंने इसी प्रोडक्शन हाउस के सीरियल मोहे रंग दे में काम किया था। किसी ने मेरा नाम सुझाया, तो मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया गया। मैंने संगीत की शिक्षा ली है। शायद यही वजह है कि मैं म्यूजिक टीचर की भूमिका के लिए चुन लिया गया।

चुनौती है निरंजन: मैं इस शो में निरंजन की भूमिका निभा रहा हूं। वह गहना का म्यूजिक टीचर है। निरंजन शांत स्वभाव का युवक है। अब तक मैंने जितनी भूमिकाएं की हैं, यह उन सबसे अलग है। आगे चलकर निरंजन की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। मेरे लिए इस भूमिका को निभाना चुनौती है। इसकी वजह यह है कि बालिका वधू लोकप्रिय सीरियल है और इसके हर चरित्र दमदार हैं। इसके सभी कलाकार दर्शकों के दिल में जगह बना चुके हैं। निरंजन की भूमिका निभाना मेरे लिए बड़ी चुनौती है। मैं अपना सौ प्रतिशत दे रहा हूं। बाकी बात दर्शकों की पसंद के ऊपर निर्भर है।

गर्व है खुद पर: मेरा जन्म और परवरिश गाजियाबाद के मुराद नगर में हुई है। मेरे खानदान में दूर-दूर तक कोई एक्टिंग की दुनिया में नहीं है। यही वजह है कि बचपन में जब मेरे रिश्तेदार मुझसे पूछते कि बड़े होकर क्या बनोगे और जवाब में मैं कहता कि एक्टर बनूंगा, तब सब हंसते थे। मैंने दिल्ली में दो साल थिएटर किया। उसके बाद मुंबई आ गया। मेरा पहला सीरियल था कहता है दिल। मुझे पहचान जी टीवी के सीरियल जब लव हुआ से मिली। मैं बिना किसी की मदद के यहां तक पहुंचा हूं। आज मेरे परिवार के लोग और रिश्तेदार मुझ पर गर्व करते हैं।

फिल्में हैं लक्ष्य: मैं रोल के मामले में शुरू से चूजी हूं। यही वजह है कि मेरी प्रत्येक भूमिका दर्शकों को अच्छी लगती है। मेरे पास जब किसी भूमिका का प्रस्ताव आता है, तब सबसे पहले मैं दर्शक के रूप में उसे देखता हूं। यदि वह मुझे नहीं पसंद आती है, तो सीधे मना कर देता हूं। मैं काम के पीछे नहीं भागता। मेरा लक्ष्य परफॉर्मेस ओरिएंटेड रोल करना है। सीरियल और फिल्म से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हां, मेरा लक्ष्य फिल्में जरूर हैं, लेकिन फिल्मों में काम करने के लालच में मैं कुछ भी नहीं कर सकता। मैं इस बात का खयाल रखता हूं कि भूमिका दमदार हो। यदि मेरी उपस्थिति से फिल्म का महत्व बढ़ेगा, तभी मैं उसका हिस्सा बनूंगा, वर्ना नहीं।

-रघुवेन्द्र सिंह

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