कोई गिला शिकवा नहीं: आशा भोंसले

कोई गिला शिकवा नहीं: आशा भोंसले

जन्मदिन पर विशेष..

नई दिल्ली। जिंदगी के सफर को मुश्किलों से भरी अग्निपरीक्षा बताने वाली खनकती आवाज की मलिका आशा भोंसले का कहना है कि उन्हें आज इसी बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि किसी सहारे के बिना इतनी कठिनाइयों का सामना करते हुए वह इस मुकाम तक पहुंची। आशा ने अपने 76वें जन्मदिन से पहले दिए इंटरव्यू में कहा, मैने जिंदगी में बहुत मुश्किलें देखी हैं। मुझे किसी का साथ नहीं मिला और न ही मेरा कोई गॉडफादर था। खुशी इसी बात की है कि तमाम हालात का सामना करके इस मुकाम पर पहुंची हूं। संकट अभी भी आते रहते हैं, लेकिन निकल जाते हैं। मुझे अब किसी से कोई गिला शिकवा भी नहीं।

तमाम उम्र अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से निकलने की जद्दोजहद में रही आशा को करियर के शुरूआती दौर में बी और सी ग्रेड की फिल्में ही मिली। लेकिन नया दौर, तीसरी मंजिल, इजाजत और उमराव जान जैसी फिल्मों के जरिए आशा ने अपनी गायिकी की अमिट छाप छोड़ी। करीब 1000 फिल्मों में अपनी आवाज दे चुकी इस ग्रेमी नांमाकित गायिका ने गैर फिल्मी संगीत में भी शोहरत की बुलंदियों को छुआ। गैर फिल्मी संगीत को अधिक तवज्जो देने वाली आशा को मलाल है कि अब संगीत कंपनियों से इसे तवज्जो नहीं मिलती और टीवी चैनल भी सिर्फ रियलिटी शो के पीछे भाग रहे हैं। आशा ने कहा, रेडियो, टीवी सभी पर रियलिटी शो का बोलबाला है, क्योंकि उसमें पैसा दिखता है। गैर फिल्मी संगीत को कोई नहीं पूछता। पहले चैनलों पर टॉप टेन भी आता था जो बंद हो गया। मेरी एलबम आशा एंड फ्रेंड्स की कंपनी (मौज म्यूजिक) ने इतने कम रिकॉर्ड बनाए कि बाजार में नजर ही नहीं आई। इसी एलबम में उन्होंने आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेटली, संजय दत्त और उर्मिला मंतोडकर के साथ गाया था। ब्रेटली के साथ फिर गाने की इच्छुक आशा ने कहा कि वह सचिन तेंदुलकर को भी अपने साथ गाते देखना चाहती है। उन्होंने कहा, मैंने सचिन से इस बारे में अभी तक बात नहीं की। लेकिन वह इतने व्यस्त रहते हैं कि पता नहीं गाएंगे या नहीं। पर मैं मिलने पर एक बार उनसे जरूर पूछने वाली हूं।

फिल्मी संगीत को ठीक-ठाक बताते हुए उन्होंने कहा कि अभी भी कभी-कभार अच्छे गाने सुनाई दे जाते हैं। मौजूदा दौर के गीतों में उन्हें सांवरिया का जब से तेरे नैना उनका सबसे पसंदीदा गीत है। उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि अच्छे गाने बनने बिल्कुल ही बंद हो गए हैं। लेकिन हर चीज में खालीपन आ गया है। उम्मीद है कि जब लोगों को गलती का अहसास होगा तो संगीत का गुजरा सुनहरा दौर फिर लौटेगा।

हाल ही में मणिरत्नम की बहुचर्चित फिल्म रावण के लिए गीत रिकार्ड करने वाली आशा ने कहा कि उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया है, क्योंकि वह मन को रास नहीं आने वाला काम नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा, मैं सिर्फ गाने के लिए नहीं गाना चाहती। मुझे अब विश्व टूर और स्टेज शो में ज्यादा रस आता है जहां श्रोताओं से सीधे जुड़ते हैं। इसके अलावा मेरे रेस्त्रां भी हैं जिनका काम देखना पड़ता है। आशा के दुबई, कुवैत और बर्मिंघम में रेस्त्रां हैं, जिनमें रसोई और साज सज्जा का जिम्मा वह खुद संभालती हैं। कल अपना जन्मदिन कैसे मनाएंगी, यह पूछने पर उन्होंने कहा, मैं अपना जन्मदिन कभी नहीं मनाती। मेरे प्रशंसक ही मनाते हैं। इस साल भी मैं घर पर सारा दिन बच्चों के साथ रहूंगी।

लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(6) वोट का औसत

average:4.5
Saving...
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित