कैसे फैलेगा उजियारा

कैसे फैलेगा उजियारा

प्रकाश पर्व दीपावली की रात दीप प्रज्जवलित कर सांकेतिक रूप से दुनिया को रोशन करने की कामना की जाती है। इस प्रथा में सुनहरे भविष्य की आहट छुपी है। दीपावली की रोशनी ऐसे नए युग की ओर संकेत करती है, जहां नई उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा होती है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस प्रतीकात्मक पर्व पर हम ने रुपहले पर्दे के सितारों से पूछा कि ऐसा क्या करें, जिससे हमारा समाज भी जगमग हो जाए?

बिपाशा बसु-सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं..

समाज में उजाला तभी फैलेगा, जब सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। चलता है..इस सोच को छोड़ना पड़ेगा। अपने-अपने काम के प्रति समर्पित होना पड़ेगा। सभी अपने हिस्से का काम ईमानदारी से करेंगे, तो समाज भी दीपावली के दीये की तरह जगमगाने लगेगा। साथ ही, औरतों के प्रति भी समाज का नजरिया बदलना जरूरी है। पुरुषों की तुलना में उनका काम अधिक प्रभावी होता है। दरअसल, औरतों का नजरिया संतुलित होता है। इसी वजह से वे पुरुषों से बेहतर होती हैं। जिस समाज में औरतों को इज्जत मिलेगी, वह समाज हमेशा प्रगति करेगा।

असिन-अनुशासन जरूरी है..

अगर हम सही मायने में अपने समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो हम सबको अनुशासित होना पड़ेगा। तभी समाज मेंभी उजाला फैलेगा। पॉजिटिव सोच भी बेहद जरूरी है। इससे काम करने की ऊर्जा मिलती है। जिस तरह हर दीये की रोशनी से दिवाली की रात की जगमगाहट बढ़ती है, उसी तरह हर व्यक्ति को अपनी पॉजिटिव सोच और व्यवसाय के प्रति समर्पण से समाज में योगदान देना होगा। तभी समाज में उजियारा फैलेगा।

रितेश देशमुख-प्यार बांटें..

दीपावली के दिन मैं चाहूंगा हम सब मिलकर प्यार बांटे। बड़ी से बड़ी समस्या का हल प्यार से निकल सकता है। इस तरह से दुश्मन को भी दोस्त बनाया जा सकता है। हम सभी को प्यार बांटना चाहिए और खुशी का माहौल बनाना चाहिए। खुद की खुशी के लिए पटाखे नहीं जलाने चाहिए। पटाखों में फिजूलखर्ची होती है साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता है। जोखिम तो रहता ही है। दीपावली के दिन दीये जलाएं, पटाखे नहीं। प्यार से लोगों से मिलें। आपका यह छोटा सा योगदान समाज के लिए काफी होगा।

तनुश्री दत्ता-मन का दीप जलाएं..

कई सारी बाते हैं, जिन पर गौर करने से हमारे समाज में खुशियों का उजियारा फैल सकता है। सबसे पहले लोगों को सहनशील बनना पड़ेगा। अपना व्यवहार सुधारना पड़ेगा। एक सभ्य समाज की यह जरूरत है कि सभी लोग स्वयं में एक-दूसरे को क्षमा करने की भावना विकसित करें। आपसी संपर्क भी जरूरी है। एक-दूसरे से संपर्क बना रहेगा, तो किसी भी विषय पर सकारात्मक विचार-विमर्श हो सकता है। अब वह दौर आ गया है, जब हम सब एक बेहतर समाज बनाने की दिशा में अपनी ओर से प्रयास करें। दिवाली के दिन केवल मिट्टी के दीये जलाने से ही काम नहीं चलेगा, मन का दीप भी जलाना होगा, तभी हमारा समाज भी खुशियों की रोशनी से जगमग हो सकेगा।

समीरा रेड्डी-हर तरफ खुशी का माहौल रहे..

प्यार की रोशनी से समाज जगमग हो सकता है। ऐसा तभी संभव है, जब समाज में एकता और खुशी का माहौल बना रहे। एक-दूसरे के लिए हमारे दिल में इज्जत होनी चाहिए। किसी को कमतर नहीं मानना चाहिए। तभी हम सब मिलकर किसी भी मुश्किल का सामना कर सकेंगे। यह मुश्किल नहीं है। बस, खुद पर भरोसा हो और मन साफ रहे। मुझे उम्मीद है कि इन जलते दीपों की श्रृंखला हमारे समाज, हमारे देश और पूरी दुनिया को प्यार की रोशनी से जगमग कर देगी।

हरमन बावेजा- शिक्षा का प्रकाश फैलाएं..

हमें अपने करीब काम करने वालों जैसे ड्राइवर, वॉचमैन, सब्जी वाले, स्पॉट ब्वॉयज् आदि को शिक्षा का महत्व बताना चाहिए। उन्हें प्रेरित करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। दीपावली के दिन हमें शिक्षा का प्रकाश फैलाना चाहिए। यदि समाज में सभी शिक्षित होंगे, तो अनेक समस्याएं खुद ब खुद दूर हो जाएंगी। हमें यहां शिक्षितों का प्रतिशत बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए दीपावली से बेहतर कोई और दिन नहीं हो सकता।

मिनीषा लांबा- भेदभाव खत्म करें..

समाज से भेदभाव की भावना खत्म करने की जरूरत है। ईश्वर ने हम सभी को इंसान बनाया है। फिर हम जाति-धर्म, अमीरी-गरीबी के आधार पर इंसान को क्यों बांटा है? इस बंटवारे से हमारा खुद का कहीं न कहीं नुकसान होता है। हमें प्यार बांटना होगा। हर इंसान में मुहब्बत की भावना जगानी होगी। आज हमारे समाज के लिए यह जरूरी है। दीपावली के दिन दीये जरूर जलाएं, लेकिन किसी से भेदभाव न करें। सबसे प्यार से मिलें।

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