
मुंबई में पली-बढ़ी होने के कारण फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ग्रामीण भारत की कला और प्रतिभाओं को करीब से देखने से वंचित रह गई। कलर्स के रिअॅलिटी शो इंडियाज गॉट टैंलेंट से जुड़ने के बाद उन्हें अहसास हो गया कि उन्होंने क्या खोया है। सोनाली उन लोगों को भाग्यशाली मानती हैं, जिन्होंने ग्रामीण भारत का सुख लिया है। एक मुलाकात में सोनाली ने दिए तीन सवालों के जवाब..।
क्या आप मानती हैं कि शहर में पली-बढ़ी होने के कारण गांव की जिंदगी के सुख से वंचित रह गई?
मुझे इस बात का अहसास इंडियाज गॉट टैलेंट से जुड़ने के बाद हो रहा है। मैं मुंबई की हूं। मैंने शहर की जिंदगी देखी है। मुझे जब भी फुर्सत मिली, मैं विदेश गई। मुझे गांव की जिंदगी, वहां की कला, प्रतिभाओं को देखने की जरूरत नहीं पड़ी और सच कहूं, तो मौका नहीं मिला। इस शो से जुड़कर मैं बहुत खुश हूं। इसके जरिए मुझे भारत का कल्चर देखने को मिल रहा है। मैंने नार्थ ईस्ट के छऊ डांस के बारे में सुना था, लेकिन कभी देखा नहीं था। ऐसे ही वेस्ट बंगाल के वर्द्धमान गांव से वर्द्धमान ग्रुप आया है। वे सभी कमाल का सर्कस करते हैं। मैंने गांव का सर्कस कभी नहीं देखा था। मुझे पता नहीं था कि भारत में इतनी कमाल की प्रतिभाएं हैं।
आप शो की सबसे सख्त जज मानी जा रही हैं। क्या खुद को इस रूप में देखती हैं?
मुझे नहीं लगता कि मैं सख्त जज हूं। हां, मैं झूठ नहीं बोलती और वह मैं इसलिए करती हूं, क्योंकि यदि मैं झूठ बोलूंगी, तो उसे याद रखना पड़ेगा। लाइफ में मेरी सिंपल पॉलिसी है। हमेशा सच बोलो। आप एक झूठ बोलते हैं, तो फिर उसे छुपाने के लिए दस और झूठ बोलने पड़ते हैं। यही वजह है कि मैं हमेशा सच बोलती हूं।
क्या आप फिर फिल्मों में दिखेंगी?
फिलहाल नहीं, क्योंकि फिल्मों की शूटिंग में बहुत समय देना पड़ता है। मुझे इस शो की शूटिंग के लिए सप्ताह में दो दिन देने पड़ते हैं, जो मेरे लिए मुश्किल होता है। मेरा बेटा रणबीर अभी बहुत छोटा है। इस वक्त मेरा उसके साथ होना जरूरी है। मुझे अधिक काम करने में दिलचस्पी भी नहीं है। मेरे पास काम करने के ऑफर आते हैं, लेकिन मैं उन्हें करने से इंकार कर देती हूं। इस वक्त मैं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दे रही हूं।