छोटी सफलता को बड़ी कामयाबी न समझें

छोटी सफलता को बड़ी कामयाबी न समझें


ेपिछले दिनों सीमित बजट की कुछ फिल्मों को अच्छी सराहना मिली। संयोग से वे महानगरों के मल्टीप्लेक्स थिएटरों में सप्ताहांत के तीन दिनों से ज्यादा टिकीं और उनका कुल व्यवसाय लागत से ज्यादा रहा। तीन-चार...
क्यों धीरे चलें बच्चन?

क्यों धीरे चलें बच्चन?


बहुत पहले की बात न करें। पिछले छह महीनों की दिनचर्या ही देख लें, तो अमिताभ बच्चन की व्यस्तता और सक्रियता का अनुमान हो जाएगा। सबूत के लिए उनके ब्लॉग पर जाएं। वहां दिखेगा कि पिछले छह महीनों में ही...
नया आइटम है अंडरवाटर शूटिंग

नया आइटम है अंडरवाटर शूटिंग


नवीनता के लिए तरस रही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को अंडरवाटर शूटिंग का नया आइटम मिल गया है। दरअसल, फिल्मों का आकर्षण बढ़ाने और दर्शकों को नए तरीकों से लुभाने की कोशिश में लगे निर्देशक इन दिनों अंडरवाटर...
गांव और गरीब गायब हैं हिंदी फिल्मों से

गांव और गरीब गायब हैं हिंदी फिल्मों से


बाजार का पुराना नियम है कि उसी वस्तु का उत्पादन करो, जिसकी खपत हो। अपने संभावित ग्राहक की रुचि, पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर ही उत्पादक वस्तुओं का निर्माण और व्यापार करते हैं। कहने के लिए...
स्वागत है सज्जनपुर में

स्वागत है सज्जनपुर में


माफ करें, स्तंभ का शीर्षक वेलकम टू सज्जनपुर का अनुवाद नहीं है। सज्जनपुर यहां उस विषय का द्योतक है, जिसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने हाशिए पर डाल रखा है। ग्लोबल होने के इस दौर में हिंदी सिनेमा ने गांव...
फिल्मों की आय से भी बनती है राय

फिल्मों की आय से भी बनती है राय


यह चलन कुछ समय से तेज हुआ है। फिल्म रिलीज होने के कुछ दिनों और हफ्तों के बाद अखबारों, ट्रेड पत्रिकाओं और इंटरनेट पर विज्ञापनों और खबरों के जरिए निर्माता फिल्म के ग्रॉस कलेक्शन की जानकारी देता है।...
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