
मुंबई के थिएटर सर्किल में मशहूर परितोष पेंटर की यह पहली फिल्म है। वे मंच पर इसी नाम के नाटक का कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। अपने लोकप्रिय नाटक को उन्होंने फिल्म का रूप दिया है।
यह चार दोस्तों की कहानी है, जो रहने के लिए एक छत खोज रहे हैं। आखिरकार उन्हें एक घर मिलता है, लेकिन मकान मालिक केवल दंपतियों को ही घर देना चाहते हैं। चारों दोस्त मिल कर युक्ति निकालते हैं। दो दोस्त बीवियों का रूप धारण कर लेते हैं। फिल्म अंत तक आते-आते रोमांच, प्रपंच और रोमांस के भारी कंफ्यूजन में फंस जाती है। इस फिल्म में हास्य कलाकरों की भीड़ शामिल है।
विधा- कामेडी
-अजय ब्रह्मात्मज