..जब किशोर ने वित्तीय मदद की पेशकश की

..जब किशोर ने वित्तीय मदद की पेशकश की


कोलकाता। शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि सदाबहार गायक किशोर कुमार ने अपने मामा सत्यजीत रे को पाथेर पंचाली बनाने के समय वित्तीय मदद की पेशकश की थी क्योंकि उन दिनों 1955 में फिल्म की शूटिंग के समय...
बी.आर.चोपड़ा: उद्देश्यपरक फिल्में बनाने में माहिर

बी.आर.चोपड़ा: उद्देश्यपरक फिल्में बनाने में माहिर


पुण्यतिथि पांच नवंबर पर विशेष... नई दिल्ली। नया दौर, गुमराह, वक्त, धर्मपुत्र, निकाह, धूल का फूल , बागबान जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले निर्माता निर्देशक बी. आर.चोपड़ा हिंदी सिने...
पृथ्वीराज कपूर: भारतीय सिने जगत के पहले मुगल

पृथ्वीराज कपूर: भारतीय सिने जगत के पहले मुगल


3 नवंबर, जन्मदिन पर विशेष.. नई दिल्ली। भारतीय फिल्मों के आदिकाल से रंगीन सिनेमा तक के सफर का हिस्सा रहे पृथ्वीराज कपूर को भारतीय सिने जगत का पहला मुगल कहा जाए तो गलत न होगा। उनकी...
राजकुमारों जैसी जिंदगी जी मैंने: शम्मी कपूर

राजकुमारों जैसी जिंदगी जी मैंने: शम्मी कपूर


नई दिल्ली। मैने ऐसी जिंदगी बिताई है जो सभी को नसीब नहीं होती। सही मायने में कहूं तो मैंने जिंदगी वाकई एक राजकुमार की तरह जी है। यह कहना है जिंदगी के 78 बसंत देख चुके मशहूर बॉलीवुड अभिनेता शम्मी...
कला हिन्दी सिनेमा के सशक्त हस्ताक्षर है ओमपुरी

कला हिन्दी सिनेमा के सशक्त हस्ताक्षर है ओमपुरी


18 अक्तूबर जन्मदिन पर विशेष.. नई दिल्ली। कला फिल्मों के जरिए अपने फन का लोहा मनवाने के बाद तमाम तरह की भूमिकाओं में अपने दमदार अभिनय से रंग भरने वाले ओमपुरी व्यवसायिक सिनेमा के...
सहज अभिनय के पर्याय थे अशोक कुमार

सहज अभिनय के पर्याय थे अशोक कुमार


13 अक्तूबर को जन्‍मदिन पर विशेष.. नई दिल्ली। हिन्दी फिल्मों के आंरभिक दौर के नायकों में अशोक कुमार एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने प्रचलित पारसी थिएटर के संस्कारों को ताक पर रखते हुए...
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