
29 सितंबर को जन्मदिन पर विशेष..
नई दिल्ली। हिंदी फिल्मों में हास्य अभिनेता के कद को बढ़ाकर नायक के करीब लाने वाले कामेडियनों में सबसे पहले महमूद का नाम ही सामने आता है, जिन्होंने हास्य अभिनय में हजारों रंग बिखेर कर दर्शकों को हमेशा जी भरकर हंसने को मजबूर किया। करीब तीन दशक में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले महमूद ने वैसे तो हर तरह की भूमिकाएं कीं, लेकिन कामेडी का रंग उन पर ऐसा चढ़ा कि वही उनकी असली पहचान बन गया। किसी हास्य अभिनेता के लिए इससे ज्यादा सम्मान की बात क्या हो सकती है कि उसके ही जीवनकाल में लोग उसकी शैली और उसके निभाए गए पात्रों की नकल करें।
सुपर स्टार अमिताभ बचन ने देशभक्त फिल्म के एक गाने में महमूद द्वारा निभाए गए हैदराबादी पात्र की नकल की थी। इसी तरह कई अभिनेताओं ने उनके इसी पात्र की नकल की है। अभिनेता मुमताज अली के पुत्र महमूद का जन्म 29 सितंबर 1932 को हुआ था। वैसे तो उन्होंने बाल कलाकार के रूप में कुछ फिल्मों में काम किया था, लेकिन वयस्क होने पर फिल्मों में अभिनय करने से पहले उन्होंने तमाम तरह के काम किए जिनमें वाहन चालक का काम भी शामिल है। महमूद ने कुछ समय उस दौर की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी को टेबल टेनिस का प्रशिक्षण दिया और बाद में उनकी बहन मधु से विवाह किया। सीआईडी, प्यासा और दो बीघा जमीन फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों के जरिए अपने अभिनय जीवन की शुरूआत करने वाले महमूद ने जल्द ही अपने हास्य अभिनय की एक खास शैली विकसित की। कुछ आलोचकों की नजर में यह शैली लाउड थी, लेकिन दर्शकों ने इस शैली को काफी पसंद किया।
हमजोली फिल्म में उन्होंने जहां कपूर परिवार की तीन पीढि़यों पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर और रणधीर कपूर की नकल कर दर्शकों को लोटपोट कर दिया, वहीं पड़ोसन फिल्म में दक्षिण भारतीय संगीत शिक्षक की भूमिका निभाकर संगीतमय कॉमेडी का एक नया इतिहास रच डाला। पड़ोसन फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य है कि अपने अभिनय जीवन की शुरूआत में जब महमूद ने किशोर कुमार से उनकी फिल्मों में काम मांगा था तो किशोर ने उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया कि वह तो उनकी जगह खा जाएंगे। उसी समय महमूद ने कहा कि जब वह अपनी फिल्म बनाएगे तो किशोर कुमार को अवश्य काम देंगे। महमूद ने अपनी यह बात पूरी करते हुए पड़ोसन में किशोर को जो भूमिका दी वह आज भी इस गायक कलाकार द्वारा निभाई गई चंद अच्छी भूमिकाओं में शुमार की जाती है।
ससुराल, जिंदगी, गुमनाम, प्यार किये जा, लव इन टोकियो, आंखें दो फूल, दिल तेरा दीवाना जैसी फिल्मों में जबरदस्त हास्य अभिनय करने वाले महमूद की शोभा खोटे के साथ जोड़ी को दर्शकों ने काफी पंसद किया। बाद में शोभा खोट के स्थान पर अरुणा ईरानी ने उनके साथ कुछ फिल्में कीं। महमूद ने कुंवारा बाप, मैं सुंदर हूं जैसी लीक से हटकर फिल्में भी बनाई, लेकिन दर्शकों के मन में उनके कॉमेडियन की छवि के कारण इन फिल्मों को ज्यादा सफलता नहीं मिली। महमूद ने अपने दौर के एक अन्य प्रसिद्घ अभिनेता आई.एस जौहर के साथ भी फिल्में की। इनमें नमस्तेजी, जौहर महमूद इन गोवा, जौहर महमूद इन हांगकांग, काफी लोकप्रिय हुई। महमूद के व्यक्तित्व में तमाम रंग थे। इनमें से एक था नए लोगों को मौका देना। उन्होंने छोटे नवाब फिल्म में संगीतकार राहुल देव बर्मन को पहली बार मौका देकर फिल्म उद्योग को एक बेहतरीन तोहफा दिया था।
इसी प्रकार महमूद ने सुपर स्टार अमिताभ बच्चन की उस समय मदद की थी जब वह संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे। उनके कैरियर को बल देने के लिए महमूद ने बांबे टु गोवा बनाई थी। अमिताभ ने एक अभिनेता की लाचारी बयान करते हुए एक साक्षात्कार में महमूद के जीवन का एक वाक्या सुनाया था। महमूद की एक बच्ची जन्म लेने के बाद अस्पताल में मर गई थी। उसी समय महमूद अमिताभ के साथ अपनी पत्नी को देखने गए। लोगों ने उसी समय अस्पताल में महमूद को घेर लिया और उनसे फिल्मों के मजकिया संवाद और चुटकुले सुनाने का आग्रह करना शुरू कर दिया।अमिताभ के अनुसार उस समय भी महमूद अपने चेहरे पर मुस्कुराहट बनाए रहे भले ही वह नकली हो। दरअसल, हास्य अभिनय महमूद के व्यक्तित्व का अंग बन गया था जिसे उन्होंने अपने अंतिम तौर तक निभाया।