हरदिल अजीज है शम्मी कपूर

हरदिल अजीज है शम्मी कपूर

21 अक्टूबर जन्मदिन पर विशेष..

नई दिल्ली। अपनी विशिष्ट याहू शैली के कारण बेहद लोकप्रिय रहे हिंदी फिल्मों के पहले सिंगिंग-डांसिग स्टार शम्मी कपूर जीवन के सातवें दशक में भी बेखौफ होकर कार ड्राइविंग का मजा उठाते हैं और अपना काफी समय इंटरनेट को देते हैं। गुजरे दौर के इस अभिनेता का पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य नरम चल रहा है। अपने 78 वर्ष में प्रवेश कर रहे कपूर ने कहा कि स्वास्थ्य पहले से कुछ बेहतर हुआ है, लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं।

उन्होंने अपने चिरपरिचित जोशीले अंदाज में कहा कि हफ्ते में तीन दिन अस्पताल जाता हूं। बाकी चार दिन गाड़ी चलाता हूं, वीडियो पर फिल्में देखता हूं, इंटरनेट देखता हूं और परिवार के साथ समय गुजारता हूं। जंगली फिल्म के जरिए अपनी विशिष्ट नृत्य शैली के कारण मशहूर हुए शम्मी कपूर के बारे में एक दिलचस्प तथ्य है कि उन्हें नाचना नहीं आता था और तो और उन्होंने नृत्य का जो प्रशिक्षण लिया था, उसमें भी वह विफल रहे थे। सवाल उठता है जब शम्मी कपूर नृत्य नहीं जानते थे तो उन्होंने इंवनिंग इन पेरिस, तीसरी मंजिल, तुम सा नहीं देखा जैसी फिल्मों के प्रसिद्घ नृत्य कैसे किए। इस सवाल के जवाब में उन्होंने तीसरी मंजिल में हेलन के साथ किए नृत्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वह इस मशहूर नर्तकी के तेजी से थिरकते पैरों के साथ नाच नहीं सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी भाव भंगिमाओं और चेहरे के रूख से तेज नृत्य की कमी को छिपा लिया था।

शम्मी कपूर मानते हैं कि संगीत और धुन की समझ ने उन्हें नृत्य के मामले में काफी मदद की। यही वजह है कि वह आशा पारेख, मुमताज और हेलन जैसी नृत्यकला में पारंगत अभिनेत्रियों के साथ ताल से ताल मिला सके। शमशेर राज कपूर (असली नाम ) ने अभिनय की शु:आत पृथ्वी थियेटर से की। उनकी पहली फिल्म जीवन ज्योति थी। हर अच्छे अभिनेता की तरह उन्हें भी शुरू में रेल का डिब्बा, लैला मजनू, ठोकर, शमा, परवाना, हम सब चोर हैं जैसी कई असफल फिल्मों के दौर से गुजरना पड़ा। कपूर को सफलता का स्वाद 1957 में मिला जब उनकी फिल्म तुमसा नहीं देखा को दर्शकों ने सराहा। दिलचस्प है कि लोकप्रिय फिल्मकार नासिर हुसैन की यह पहली फिल्म थी। इस फिल्म में वह शुरू में देवानंद को लेना चाहते थे, लेकिन बाद में यह रोल शम्मी कपूर को मिला जिसने उनके डगमगाते फिल्मी करिअर को एक नई दिशा दे दी। शम्मी कपूर ने 1955 में लोकप्रिय अभिनेत्री गीता बाली से शादी की और इसे वह अपने जीवन का महत्वपूर्ण मुकाम मानते हैं। गीता बाली ने संघर्ष के दौर में उन्हें काफी प्रोत्साहन दिया। उनका वैवाहिक जीवन लंबा नहीं रहा। क्योंकि गीताबाली का 1966 में निधन हो गया। बाद में शम्मी ने दूसरा विवाह किया।

शम्मी कपूर के जीवन का एक अन्य महत्वपूर्ण वर्ष 1961 रहा जब जंगली फिल्म रिलीज हुई। उनकी यह पहली रंगीन फिल्म थी। फिल्म में उनकी याहू शैली और चाहे मुझे कोई जंगली कहे गाने ने कपूर को रातोंरात स्टार का दर्जा दिला दिया। इस गाने की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। शम्मी ने इसके बाद 1960 के दशक में प्रोफेसर, चाइना टाउन, प्यार किया तो डरना क्या, कश्मीर की कली, ब्लफ मास्टर, जानवर राजकुमार, तीसरी मंजिल, बद्तमीज, एन ईवनिंग इन पेरिस, प्रिंस और ब्रह्मचारी जैसी कई सफल फिल्में की। 1968 में उन्हें ब्रह्मचारी के लिए श्रेष्ठ अभिनय का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। कई फिल्म समीक्षक शम्मी कपूर की सफलता का श्रेय मोहम्मद रफी द्वारा गाए गए गानों और शंकर जयकिशन के संगीत को देते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि उनकी फिल्मों के जरि ए दर्शकों ने तेज धुन पर आधारित गानों को काफी पसंद किया। इसके अलावा शम्मी कपूर की संगीत की समझ उनके लिए काफी मददगार साबित हुई।

शम्मी कपूर की फिल्मों का एक अन्य पक्ष नई हीरोइनें थीं। जंगली में सायरा बानो, कश्मीर की कली में शर्मिला टैगोर, प्रोफेसर में कल्पना और दिल देके देखो में आशा पारेख ने उनके साथ अपने फिल्मी जीवन की शुरूआत की थी। बढ़ते मोटापे के कारण शम्मी कपूर को बाद में फिल्मों में मुख्य भूमिकाओं से हटना पड़ा, लेकिन वे चरित्र अभिनेता के रूप में फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने मनोरंजन और बंडलबाज नामक दो फिल्मों का निर्देशन भी किया, लेकिन यह फिल्में नहीं चली। चरित्र अभिनेता के रूप में शम्मी कपूर को 1982 में विधाता फिल्म के लिए श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। शम्मी कपूर एक लोकप्रिय अभिनेता ही नहीं हरदिल अजीज इंसान भी हैं। कुछ दिनों पूर्व उन्होंने कहा था कि मैंने एक प्रिंस की तरह जीवन जिया जिसका मौका कम ही लोगों को मिल पाता है। मैं तो अब बोनस या क्रिकेट की भाषा में अतिरिक्त समय में खेल रहा हूं।

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