बहुआयामी कलाकार थे संजीव कुमार

बहुआयामी कलाकार थे संजीव कुमार

पुण्यतिथि छह नवम्बर पर विशेष..

मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत में संजीव कुमार को एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने नायक, ्सहनायक, खलनायक और चरित्र कलाकार भूमिकाओं से दर्शको को अपना दीवाना बनाया। संजीव कुमार के अभिनय में एक विशेषता रही कि वह किसी भी तरह की भूमिका के लिए सदा उपयुक्त रहते थे। फिल्म कोशिश में एक गूंगे की की भूमिका हो या फिर शोले में ठाकुर की भूमिका या सीता और गीता और अनामिका जैसी फिल्मों में लवर्स बॉय की भूमिका हो या नया दिन नई रात में नौ अलग-अलग भूमिका सभी भूमिकाओं मे उनका कोई जवाब नही था।

फिल्मों में किसी अभिनेता का एक फिल्म मे दोहरी या तिहरी भूमिका निभाना बड़ी बात समझी जाती है लेकिन संजीव कुमार ने फिल्म नया दिन नई रात में में एक या दो नही बल्कि नौ अलग-अलग भूमिकाए निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। फिल्म मेंसंजीव कुमार ने लूले-लंगड़े, अंधे, बूढे, बीमार, कोढ़ी, हिजड़े, डाकू, जवान और प्रोफेसर के किरदार को निभाकर जीवन के नौ रसो को रूपहले पर्दे पर साकार किया। यूं तो यह फिल्म उनके हर किरदार की अलग खासियत की वजह से जानी जाती है लेकिन इस फिल्म मे उनके एक हिजड़े का किरदार आज भी दर्शको के मस्तिष्क पर छाया हुआ है। मुंबई में जुलाई 1938 को एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार में जन्म हुआ संजीव कुमार बचपन से हीं फिल्मों में बतौर अभिनेता काम करने का सपना देखा करते थे। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वह अपने जीवन के शुरूआती दौर में उन्होंने स्कूल-कॉलेज में अभिनय किया और बाद में गुजराती रंगमंच से जुड़ गए और फिल्मालय के एक्टिंग स्कूल मे दाखिला लिया। संजीव कुमार को वर्ष 1960 मे फिल्मालय बैनर की फिल्म हम हिन्दुस्तानी मे एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला। वर्ष 1962 मे राजश्री प्रोडक्शन की निर्मित फिल्म आरती के लिए उन्होंने स्क्रीन टेस्ट दिया जिसमें वह पास नही हो सके। सर्वप्रथम मुख्य अभिनेता के रूप मे संजीव कुमार को वर्ष 1965 मे प्रदर्शित फिल्म निशान मे काम करने का मौका मिला। वर्ष 1960 से वर्ष 1968 तक संजीव कुमार फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। फिल्म हम हिंदुस्तानी के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली वह उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने स्मगलर, पति-पत्नी, हुस्न और इश्क, बादल, नौनिहाल और गुनहगार जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों मे अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स आफिस पर सफल नहीं हुई।

वर्ष 1968 मे प्रदर्शित फिल्म शिकार मे वह पुलिस आफिसर की भूमिका मे दिखाई दिए। यह फिल्म पूरी तरह अभिनेता धर्मेन्द्र पर केन्द्रित थी फिर भी सजीव कुमार धर्मेन्द्र जैसे अभिनेता की उपस्थिति मे अपने अभिनय की छाप छोड़ने मे कामयाब रहे। इस फिल्म मे उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। वर्ष 1968 मे प्रदर्शित फिल्म संघर्ष मे उनके सामने हिन्दी फिल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे लेकिन संजीव कुमार अपनी छोटी सी भूमिका के जरिए दर्शको की वाहवाही लूट ली। इसके बाद आशीर्वाद, राजा और रंक, सत्याकाम और अनोखी रात जैसी फिल्मों मे मिली कामयाबी के जरिए संजीव कुमार दर्शको के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुए ऐसी स्थिति में पहुंच गए। जहां वह फिल्म मे अपनी भूमिका स्वयं चुन सकते थे। वर्ष 1970 मे प्रदर्शित फिल्म खिलौना की जबरदस्त कामयाबी के बाद संजीव कुमार बतौर अभिनेता अपनी अलग पहचान बना ली। वर्ष 1970 में हीं प्रदर्शित फिल्म दस्तक मे उनके लाजवाब अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कि या गया।

वर्ष 1972 मे प्रदर्शित फिल्म कोशिश में उनके अभिनय का नया आयाम दर्शको को देखने को मिला। फिल्म कोशिश मे गूंगे की भूमिका निभाना किसी भी अभिनेता के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। बगैर संवाद बोले सिर्फ आंखो और चेहरे के भाव से दर्शको को सब कुछ बता देना संजीव कुमार की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाए। इस फिल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिए उन्हे दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। खिलौना, दस्तक और कोशिश जैसी फिल्मो की कामयाबी से संजीव कुमार शोहरत की बुंलदियो पर जा बैठे। ऐसी स्थिति जब किसी अभिनेता के सामने आती है तो जल्द ही वह किसी खास इमेज मे भी बंध जाता है। लेकिन संजीव कुमार कभी भी किसी खास इमेज मे नही बंधे इसलिए अपनी इन फिल्मो की कामयाबी के बाद भी उन्होंने फिल्म परिचय मे एक छोटी सी भूमिका स्वीकार की और उससे भी वह दर्शको का दिल जीतने मे सफल रहे।

इस बीच सीता और गीता, अनामिका और मनचली जैसी फिल्मों मे अपने रूमानी अंदाज के जरिए वह जवां दिलों की धडकन भी बने। फिल्म कोशिश और परिचय की सफलता के बाद गुलजार संजीव कुमार के पसंदीदा निर्देशक बन गए। बाद मे संजीव कुमार ने गुलजार के निर्देशन मे आंधी, मौसम, नमकीन और अंगूर जैसी कअी फिल्मों मे अपने अभिनय का जौहर दिखाया 1वर्ष 1982 मे प्रदर्शित फिल्म अंगूर में संजीव कुमार की दोहरी भूमिका शायद हीं कोई भूल पाए। अभिनय मे एकरुपता से बचने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिए संजीव कुमार ने अपने को विभिन्न भूमिकाओं मे पेश किया। इस क्रम में वर्ष 1975 मे प्रदर्शित रमेश सिप्पी की सुपरहिट फिल्म शोले में वह फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी के ससुर की भूमिका निभाने से भी नही हिचके। हालांकि संजीव कुमार ने फिल्म शोले के पहले जया भादुड़ी के साथ कोशिश और अनामिका मे नायक की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1977 मे प्रदर्शित फिल्म शतरंज के खिलाडी मे उन्हें महान निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम करने का मौका मिला। इस फिल्म के जरिए भी उन्होंने दर्शको का मन मोहे रखा। संजीव कुमार दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए है। वर्ष 1975 मे प्रदर्शित फिल्म आंधी के लिए सबसे पहले उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया। इसके बाद वर्ष 1976 में भी फिल्म अर्जुन पंडित मे बेमिसाल अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे गए। अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में खास पहचान बनाने वाले अजीम कलाकार 6 नवंबर 1985 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।

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