अभिनय की भूख अभी भी बरकरार हैं: कमल हासन

अभिनय की भूख अभी भी बरकरार हैं: कमल हासन

सात नवंबर को जन्मदिन पर विशेष..

नई दिल्ली। कमल हासन एक ऐसा कलाकार है, जो हर भूमिका को जीवंत बना देता है जिसके चरित्रों में दोहराव नहीं होता, बल्कि चरित्र खुद अहसास कराता है कि वह उसी कलाकार के लिए गढ़ा गया है। उनके खाते में सर्वाधिक 19 फिल्म फेयर अवार्ड जीतने का रिकार्ड, चार राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड विजेता दर्ज है, लेकिन अभिनय की भूख अभी भी बरकरार।

दक्षिण भारत के सुपरस्टार कमल हासन की हिन्दी फिल्मों ने बॉक्स आफिस पर भले ही उन्हें सुपर हिट साबित नहीं किया, लेकिन उन्हें बॉलीवुड के दिग्गजों और हिन्दी भाषी दर्शकों के बीच बेजोड़ जरूर बना दिया। जून 2008 में रिलीज हुई दशावतारम में दस अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुके कमल हासन मानते हैं कि वास्तविक जीवन में भी हर दिन व्यक्ति को अलग-अलग भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। इन भूमिकाओं में और पर्दे पर निभाई गई भूमिकाओं में खास अंतर नहीं होता। अब तक की सबसे महंगी फिल्म दशावतारम सर्वाधिक सफल तमिल फिल्मों में से एक है। अगला प्रोजेक्ट क्या है? यह सवाल कमल हासन के लिए मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा कि काम जीवन से जुड़ा होता है। अगला क्या और पिछला क्या..। मैं अपनी पसंद का काम करता हूं और करता रहूंगा। जीवन का दूसरा नाम काम ही तो है। उनका कहना है कि कलाकार कभी संतुष्ट नहीं होता। जितना वह अपने अभिनय को निखारता जाता है उसकी भूख उतनी ही बढ़ती जाती है। कमल हासन की विविध भूमिकाएं यही बताती हैं कि उनके अंदर अभिनय की भूख कितनी अधिक है। हर बार नया कुछ और नया करने की चाहत में यह कलाकार नए-नए आयाम रुपहले पर्दे पर रचता आया है।

सात नवंबर 1954 को जन्मे कमल हासन ने अभिनय की शुरूआत छह साल की उम्र से की थी। 1960 में ए.भीमसिंह द्वारा निर्देशित कलाथुर कन्नम्मा में उन्होंने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में उनके साथ तमिल फिल्मों के दिग्गज कलाकार जेमिनी गणेशन थे। यह कमल हासन की पहली फिल्म थी और सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। युवा कलाकार के तौर पर कमल हासन ने 1972 से शुरुआत की। यह सफर आगे बढ़ता गया। 1974 में मलयालम फिल्म कन्याकुमारी के लिए उन्हें क्षेत्रीय फिल्मफेयर अवार्ड मिला। अब तक थोड़ी दूरी पर रही सफलता उनके पास 1970 के दशक में बनी अपूर्व रागनंगल के जरिए पहुंची। निर्देशक के बालचंदर की यह फिल्म पीढि़यों के अंतराल पर आधारित थी। इसी फिल्म से तमिल सुपरस्टार रजनीकांत को ब्रेक मिला था।

हिंदी में कमल हासन की पहली फिल्म एक दूजे के लिए थी जिसने बॉक्स आफिस पर जबरदस्त धूम मचाई, लेकिन इसके बाद हिंदी फिल्मों में कमल हासन का वह करिश्मा नजर नहीं आया, जो दक्षिण की फिल्मों में दिखाई देता है। इस कलाकार ने हार नहीं मानी और विलक्षण प्रयोगों का सिलसिला जारी रखा। इसी प्रयोग की कड़ी थी हास्य प्रधान मूक फिल्म पुष्पक जिसमें उन्होंने अमला के साथ काम किया था। 1997 में चाची 420 बना कर कमल हासन ने दर्शकों को खूब हंसाया। 2000 में उन्होंने हे राम बनाई जिसमें भारत का विभाजन और महात्मा गांधी की हत्या को आधार बनाया गया था। सफलता-असफलता से स्वयं को परे रखने वाले कमल हासन चौथी बार फिर निर्देशन के लिए तैयार हैं। वाल्ट डिज्नी के इस प्रोडक्शन का शीर्षक मार्मायोगी है।

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