मेरे जीवनसाथी/मधुबाला-किशोर कुमार

मेरे जीवनसाथी/मधुबाला-किशोर कुमार

जब दो टूटे दिल एक हुए

फिल्म नया दौर से हटाए जाने और दिलीप कुमार से रिश्ता तोड़ने के बाद अभिनेत्री मधुबाला का दुखी होना स्वाभाविक था और स्वाभाविक था रूमा गांगुली द्वारा तलाक लिए जाने के बाद गायक-अभिनेता किशोर कुमार का भी दुखी होना। किशोर-मधुबाला की पहली मुलाकात 1956 में हुई थी। प्रोड्यूसर जे.के. नंदा ने फिल्म शुरू की, तो उसका नाम रखा ढाके की मलमल। हीरोइन का रोल मधुबाला को दिया और हीरो बनाया किशोर कुमार को। दोनों की साथ-साथ बनने वाली यह पहली फिल्म थी और यही वह फिल्म थी, जिसकी शूटिंग करने बीमार मधुबाला आखिरी बार किसी स्टूडियो में गई, लेकिन पति के साथ बनी पहली फिल्म वे पूरी नहीं कर पाई।

जब बॉलीवुड में दबी जुबान में मधुबाला और किशोर के प्यार के चर्चे सुनाई दिए, तो आमतौर पर लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। इसकी यह वजह थी कि दिलीप कुमार बेहद गंभीर व्यक्ति हैं। उन जैसे सीरियस आíटस्ट की प्रेमिका रहीं मधुबाला किशोर जैसे मसखरे इंसान से इश्क कैसे कर सकती हैं? लोग यही सवाल एक-दूसरे से कर रहे थे। फिर मधुबाला के पिता का भी सवाल था। वे एक कट्टर पठान थे, इसलिए उनका दिलीप को स्वीकार करना स्वाभाविक था, क्योंकि वे मुसलमान थे। दिलीप चोटी के स्टार थे, बेटी मधुबाला के साथ कई फिल्में कर भी रहे थे, लेकिन यह भी एक हकीकत है कि दिलीप के व्यवहार से वे दुखी थे। उनके भरी अदालत में बेटी को घसीटने और नया दौर से निकलवाने से आहत थे। निराशा और खामोशी के उस माहौल में किशोर कुमार की बच्चों जैसी हरकतों ने उनकी उदास जिंदगी में कुछ बहार जरूर ला दी। इस बीच हिंदी में बनी क्लासिक कॉमेडी फिल्म चलती का नाम गाड़ी आई। इसमें मधुबाला ने तीनों गांगुली भाइयों अशोक कुमार, अनूप कुमार और किशोर कुमार के साथ काम किया। फिल्म सुपर हिट रही। मधुबाला के अब्बा किशोर से बहुत प्रभावित हुए। उधर मुगल-ए-आजम की शूटिंग खत्म होने वाली थी कि अताउल्ला खान यानी मधुबाला के अब्बा ने मधुबाला पिक्चर्स के नाम से एक प्रोडक्शन कंपनी की नींव रखी और अपनी दो बेटियों मधुबाला और चंचल के साथ किशोर कुमार को लेकर महलों के ख्वाब नाम से एक फिल्म शुरू कर दी। यही वह फिल्म थी, जो मधुबाला और किशोर को नजदीक ले आई। दिलीप से अलग होने के गम को किशोर कुमार ने मधुबाला की जिंदगी से उड़ा दिया।

पार्टी और महफिलों से दूर रहने वाले किशोर कुमार की खान खानदान के साथ धीरे-धीरे खूब जमने लगी। उधर किशोर कुमार की पहली पत्नी रूमा ने अपना घर बसा लिया। वे रूमा ठुकराल बन गई। अब किशोर ने अपनी जिंदगी की वीरानी को दूर करने का फैसला किया। दरअसल, खान साहब को भी अब यह यकीन होने लगा कि किशोर मधुबाला से प्यार पैसे के लालच में नहीं कर रहा है। दोनों की शादी हो जाए, तो खान खानदान को खुशी होगी। उधर किशोर अपनी शामें अक्सर गिरनार में बिताने लगे। वे मधुबाला को बाहर लेकर कम ही गए और जब गए, तो बुरका उनकी गर्लफ्रेंड को छुपाए रहता था। अक्सर प्रेमी अपनी प्रेमिका को इम्प्रेस करने के लिए महंगे तोहफे देते हैं, लेकिन कंजूसी के लिए मशहूर किशोर इन फिजूल की बातों पर पैसा वेस्ट नहीं करते थे। हां, कभी-कभार वे मधुबाला को उनके मनपसंद गुलाब के फूलों का गुलदस्ता जरूर दे जाते थे।

किशोर कुमार के व्यवहार से सिर्फ मधुबाला ही प्रभावित नहीं थीं, खान साहब के परिवार के भी वे धीरे-धीरे प्रिय बन चुके थे। अब लोगों को यह यकीन हो गया कि किशोर अच्छा दामाद साबित होगा। एक दिन उन्होंने मधुबाला से पूछ ही लिया कि किशोर से अगर तुम्हारा रिश्ता तय कर दिया जाए, तो ठीक रहेगा? वे बोलीं, आप जैसा ठीक समझें, वैसा करें।

खान साहब ने किशोर कुमार से बात की। भला किशोर को हिंदुस्तानी सिनेमा की वीनस से शादी करने में क्या ऐतराज हो सकता था! लेकिन खान साहब की एक शर्त यह भी थी कि शादी करने से पहले किशोर को इसलाम धर्म स्वीकारना होगा। मौलवी निकाह कराएगा। मधुबाला जैसी पत्नी पाने के लिए इस शर्त को मान लेने में किशोर को कोई ऐतराज नजर नहीं आया। निकाह की तारीख तय हो गई और बंगले पर निकाह की रस्म पूरी हुई। किशोर से कलमा पढ़वाया गया। इस तरह हिंदी फिल्मों की सबसे खूबसूरत हीरोइन मधुबाला किशोर कुमार की जीवनसाथी बन गई।

-बच्चन श्रीवास्तव

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