
सागर। मेरे मन को भाया, कुत्ता काट के खाया। हमसे लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, मगर कमीनापन कहां से लाओगे। जैसे संवादों को सुनते ही चाइना गेट के जगीरा की याद आ जाती है। इस दुर्दात चरित्र के लिए मशहूर मुकेश तिवारी खुद को सीमित भूमिका में कैद करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनकी इच्छा ऐसी भूमिकाएं निभाने की है, जिनसे उनकी छवि संपूर्ण कलाकार की बने।
मध्यप्रदेश के छोटे से शहर सागर में पले बढे़ मुकेश तिवारी बॉलीवुड में अपना मुकाम स्थापित कर चुके हैं। राष्ट्रीय नाट्य अकादमी से स्नातक करने के बाद वे गिरीश कर्नाड जैसे रंगकर्मियों के निर्देशन में काम कर चुके हैं। चाइना गेट में जगीरा का किरदार निभाकर रातोंरात स्टार बने मुकेश ने पिछले डेढ़ दशक में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अब मुकेश तिवारी जल्दी ही खलबली, गोलमाल रिटर्न, हार्न ओ के प्लीज, हैलो डार्लिग और क्या टाइम है यार जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करेंगे। अपने गृह नगर आए मुकेश ने कहा कि वे खुद को सीमित दायरे में नहीं बांधना चाहते। उन्हें लोगों ने पहले चाइना गेट में देखा। इसकेबाद उन्होंने गंगाजल एवं अपहरण में अपनी सशक्त भूमिका से दर्शकों का दिल जीत लिया। वर्तमान दौर कॉमेडी का है, इसलिए वे भी इन फिल्मों में काम कर रहे हैं।
मुकेश, कमल हसन और नसीरुद्दीन शाह से काफी प्रभावित हैं। उनका कोई आदर्श नहीं है, लेकिन इन दोनों कलाकारों की तरह वे अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। वे अभिनेताओं के राजनीति में आने को बुरा नहीं मानते।