
नई दिल्ली। हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय वर्तमान गायकों में से एक शांतनु मुखर्जी शान का मानना है कि आज से छह-सात साल बाद फिल्मों में से पार्श्व गायन का जादू खत्म हो जाएगा।
शान ने कहा कि छह-सात साल बाद पार्श्व गायन का जादू खत्म हो जाएगा। मुझे तो अपने कैरियर के शुरु में ही यह बात महसूस होती थी कि एक दिन फिल्मों में संगीत और गायन का जादू कम हो जायेगा और भविष्य में केवल संगीतमय फिल्मों का ही प्रभाव नहीं रहेगा।
शान हिंदी फिल्म उद्योग के गायकों की वर्तमान कड़ी के सबसे मजबूत युवा गायकों में से एक कहे जा सकते हैं। पिछले एक अर्से से रियलिटी शो सारेगामापा की मेजबानी और बाद में चैनल स्टार प्लस पर वाइस आफ इंडिया के एंकर के रुप में भी उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की है।
उन्होंने माना कि रियलिटी शो और इस तरह की स्पर्धाओं से जो प्रतिभाएं आ रहीं हैं उन्हें कैरियर का सही मुकाम नहीं मिल पा रहा है। हालंाकि वह यह भी कहते हैं कि इन प्रतियोगिताओं के विजेता निजी एलबम स्टेज शो कर रहे हैं और उन्हें आगे अच्छे अवसर मिलेंगे।
शान कहते हैं कि इन नवोदित प्रतिभाओं को फिल्मों में गाने का मौका इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि फिल्मों में आज सुर का नहीं केवल अलग किस्म की आवाज का प्रचलन है। फिल्मों में पिछले कुछ सालों में अलग खनक वाले नये गायकों की आवाज सुनने को मिल रही है चाहे वे बेसुरे हों।
शान यह भी कहते हैं कि चैनलों पर होने वाली इस तरह की प्रतियोगिताओं से निकली प्रतिभाओं को अपने स्तर पर मुकाम बनाना होगा और पार्श्व गायन को भुलाकर निजी एलबम स्टेज शो आदि पर ध्यान देना होगा।
शान ने बताया कि प्रतियोगिता में इस बार 24 राज्यों से 24 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं। इस तरह शो में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व हो सकेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रदेश के नाम पर शामिल होने से ये शो प्रांतवाद को बढ़ावा नहीं देते तो उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि इस बार सभी प्रतियोगियों के लिए भारत के नाम पर वोट मांगे जाएं न कि उनके प्रदेश के नाम पर।
रियलिटी शो में एसएमएस के जरिये वोटिंग के विवादास्पद तरीके पर शान ने कहा कि इस बार शो में 50 प्रतिशत फैसला जज करेंगे और 50 प्रतिशत फैसला जनता वोटिंग के जरिए करेगी। फाइनल में केवल दो प्रतियोगियों के रह जाने पर पूरा फैसला जनता के हाथ में होगा क्योंकि ऐसे मौके पर निर्णायकों को सही प्रतिभा चुनने में परेशानी आती है।
शान ने तो यहां तक दावा किया कि हमारा विश्लेषण बताता है कि अब वोटिंग के लिए जो भी एसएमएस होते हैं उनके पैसे का थोड़ा सा भी अंश चैनल के खाते में नहीं जाता। यह तो केवल जनता को प्रतियोगिता में शामिल करने का तरीका है।