
मुंबई। प्रख्यात फिल्म निर्देशक तपन सिन्हा को वर्ष 2006 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। पुरस्कार के तहत 10 लाख रुपये नकद, एक स्वर्ण कमल तथा एक शॉल दिया जाता है।
सिन्हा को विभिन्न वर्गो में 19 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनमें बर्लिन, वेनिस, लंदन, मास्को, सनफ्रांसिस्को और लोकानों के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिए गए पुरस्कार शामिल नहीं हैं। उन्होंने वर्ष 1946 में कोलकाता के न्यू थिएटर में साउंड इंजीनियर के रूप में अपना फिल्मी सफर शुरू किया था।
वर्ष 1950 में उन्हें ब्रिटेन के पाइनवुड स्टूडियो में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, जहां उन्होंने दो वर्ष बिताए। भारत लौटने के बाद उन्होंने फिल्म निर्देशन की ओर अपना ध्यान बढ़ाया और साथ ही बंगला, हिन्दी और उडि़या में फिल्मों का निर्माण किया।
उन्होंने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कृतियों काबुली वाला, क्षुधितो पाषाण और अतिथि पर तीन फिल्में बनाई।
सिन्हा की सिनेमा कृतियों की यात्रा अंकुश (1954), उपहार (1955), तोन्सिल (1956), लौह कपाट (1957), कालोमती (1957), हंसुली बांकेर उपकथा (1962), सगीना महतो (1970), बांछारामेर बागान (1980), अदालत ओ एकटी मेये (1982), एक डॉक्टर की मौत (1991) और शताब्दीर कन्या (2001) के रूप में लोगों के समक्ष आई।