
नई दिल्ली। पेरिस में यूरोस्टार ट्रेन में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना, ट्रेन का इंग्लिश चैनल में बनी सुरंग से गुजरना, दो घंटे में पेरिस से लंदन का आरामदायक सफर, इलाहाबाद और दिल्ली में ट्रेन के सफर की याद और गतिमान जीवन का अहसास कराती पिता की पंक्तियां जीवन की आपाधापी में..। इस बार सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लाग में यही तानाबाना बुना है।
पेरिस से लंदन तक दो घंटे के सफर को शानदार अनुभव बताते हुए अमिताभ ने लिखा है कि स्टेशन पर आब्रजन एवं पासपोर्ट संबंधी जांच पूरी हो गई। मुस्कुराते कुली और रेलवे कर्मचारी हर यात्री की मदद के लिए तैयार थे। कुछ ने मुझे पहचान लिया, मुझसे आटोग्राफ और मेरी तस्वीरें लीं और यूरोस्टार के केबिन तक मुझे विनम्रतापूर्वक पहुंचाया। यूरोस्टार पेरिस गेरे डु नोर्ड से चलती है।
अमिताभ के अनुसार, डिब्बा बिल्कुल साफ सुथरा था। भीड़ नहीं बल्कि गिने चुने यात्री थे। मैं खिड़की के पास वाली सीट पर बैठा था। ट्रेन कब चली और कब अधिकतम रफ्तार पकड़ ली पता ही नहीं चला। कोई शोर नहीं था। सब कुछ बेहद शांत आरामदायक। समय चुटकियों में गुजरने लगा।
उन्होंने लिखा है कि अचानक हल्का अंधेरा हुआ। ट्रेन इंग्लिश चैनल में बनी सुरंग से गुजर रही थी। ऐसा लगा कि इसकी गति धीमी हो गई। एक अलग सी गंध का अहसास और 15.20 मिनट में आ गया लंदन का चमचमाता साफसुथरा स्टेशन। एक अलग संस्कृति। अमिताभ को इस सफर से दिल्ली और इलाहाबाद में ट्रेन के सफर की याद आ गई। उन्होंने लिखा है कि तब एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने में मजा आता था। ट्रेन के रूकते ही स्टेशन पर खड़े खोमचे वालों की आवाजें आने लगती थीं। मैं कुछ देर ट्रेन से उतर कर स्टेशन पर टहलता था। जैसे ही गार्ड हरी झंडी दिखाता था ट्रेन की सीटी बजती थी, मैं दौड़ कर ट्रेन में चढ़ जाता था।
उन्होंने लिखा है कि संघर्ष के दिनों में तीसरे दर्जे के डिब्बे में भी मैंने सफर किया है। उफ..वह भीड़, धक्कामुक्की, लेटने या आराम से बैठने की बात छोडि़ए खड़ा होना भी मुश्किल होता था। दिन हो या रात हिलते हिलते सफर..,कोयले का धुंआ..,सुबह नहा कर पहनी हुई सफेद कमीज और चेहरे पर कोयले का उड़ता चूरा डेरा जमा लेता था। कुल मिला कर थकाऊ असुविधाजनक, लेकिन आनंददायक सफर होता था। अमिताभ लिखते हैं कि समय गुजरता रहता है। ऐश्वर्या भी दूरस्थ गांव में अपनी लोकेशन पर हैं। अभिषेक मुंबई में दोस्ताना की फिनिशिंग शूटिंग कर रहे हैं। मेरा टूर खत्म हो गया है। स्टूडियो याद आ रहा है। वापस जाना है। उन्होंने लिखा है कि कल यूरोस्टार लंदन से पेरिस जाएगी..कई यात्री..हवाईअड्डा..भीड़..इस भीड़ में एक शख्स होगा..अमिताभ बच्चन। गतिमान जीवन..पिताजी की लिखी पंक्तियां कितनी सटीक हैं।
जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिला
कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूं
जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला..।