जन्मस्थली से मिलेगा नायाब तोहफा लता को

जन्मस्थली से मिलेगा नायाब तोहफा लता को

इंदौर। भारतीय संगीत की जीवित किंवदंती लता मंगशेकर की शान में उनके एक जुनूनी प्रशंसक ने हजारों ग्रामोफोन रिकार्ड इकट्ठे किए हैं। लता की जन्म स्थली इंदौर में इस निजी संग्रह को सार्वजनिक संग्रहालय की शक्ल दी गई है। सुरों की मलिका 28 सितंबर को जीवन के 80वें बसंत में प्रवेश करने जा रही हैं। ग्रामोफोन रिकार्ड संग्रहालय का औपचारिक उद्घाटन उनकी सालगिरह की पूर्व संध्या पर किया जाएगा।

वर्ष 1929 में जन्मी लता के अलबेले प्रशंसक और इस अनूठे संग्रहालय की नींव रखने वाले 59 साल के सुमन चौरसिया रेलवे स्टेशन पर खाने पीने की चीजों का छोटा सा स्टॉल चलाते हैं। लता के गाए पुराने गीत सुनने की लगन लगी, तो वह ग्रामोफोन रिकार्ड ढूंढने लगे। यह तलाश आखिरकार जुनून बन गई और आज उनके संग्रह में पूरे 28,000 बेशकीमती रिकार्ड हैं। चौरसिया ने कुछ संगीतप्रेमियों की मदद से अपने संग्रह को चिरस्थायी बनाने के लिए इसे संग्रहालय का आकार दिया है। स्वर साम्राज्ञी के सम्मान में इसे नाम दिया गया है, लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकार्ड संग्रहालय।

उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं लता की जन्म स्थली इंदौर में पैदा हुआ। लिहाजा जब भी मुंबई जाता हूं, उनकी चरण धूलि माथे पर लगाना नहीं भूलता। लता की आवाज अमर है और यह संग्रहालय इस अमरता को सहेजने का मामूली जतन। अपने किस्म के संभवत इकलौते संग्रहालय को तैयार करने में चौरसिया को चालीस साल लग गए। इसमें लता के गाए 5,900 गानों के साथ साथ लोकसंगीत, गजल, कव्वाली और सूफी मौसिकी के नायाब ग्रामोफोन रिकार्ड मौजूद हैं। इनके अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश और पश्चिमी देशों के संगीत की अनमोल धरोहरों को भी संग्रहालय में करीने से संजोया गया है। इंदौर के पिगडंबर में 1600 वर्ग फुट में बना संग्रहालय ग्रामोफोन रिकार्ड से ठसाठस दिखता है। लेकिन चौरसिया का कहना है कि जो थम जाए वह जुनून क्या। वह लंबी फेहरिस्त दिखाते हुए कहते हैं कि अब तक जो भी कमाया ग्रामोफोन रिकार्ड खरीदने में लगा दिया। इस काम में पैसे की कमी हुई तो खेती बाड़ी तक बेच डाली।

मगर मुझे अब भी 1300 रिकार्ड की तलाश है। मैं इन्हें किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता हूं, क्योंकि कई अनमोल मगर तकरीबन अनसुने नगमे बरसों से श्रोताओं की बाट जोह रहे हैं। चौरसिया ने कहा कि मेरे पास लता के गीतों के ज्यादातर ग्रामोफोन रिकार्ड मौजूद हैं। उन पर फिल्माए गए पहले गीत से लेकर उनके द्वारा रेडियो के लिए गाए गानों तक। हालांकि मैं अब भी उनके कई दुर्लभ नगमे ढूंढ रहा हूं। वह कहते हैं कि यह काम घास में सुई ढूंढने जैसा है। ग्रामोफोन को चलन से बाहर हुए बरसों बीत चुके हैं और कई रिकार्ड तो ऐसे हैं जो बेहद कम संख्या में बाजार में उतारे गए थे। चौरसिया बड़े गर्व से बताते हैं कि वह नामी संगीत कंपनियों को सैकड़ों नायाब ग्रामोफोन रिकार्ड मुहैया करा चुके हैं। संग्रहालय की शेल्फ में रखे दो ग्रामोफोन रिकार्ड की दूरी भले ही इंच भर से भी कम हो। लेकिन चौरसिया ही जानते हैं कि इन्हें पाने के लिए उन्हें कितने हजारों किलोमीटर का सफर तय करना पडा और कितनी जद्दोजहद करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकार्ड संग्रहालय संगीत के कद्रदानों और शोधार्थियों की हर मुमकिन मदद करेगा। हमने संग्रहालय में गीत सुनवाने का इंतजाम किया है। शोधार्थियों के ठहरने के लिए वहां दो कमरे भी बनाए गए हैं।

लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(2) वोट का औसत

average:5
Saving...
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित