
मुंबई। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के रविवार को जीवन के अस्सी वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर प्रख्यात शायर और गीतकार जावेद अख्तर ने कहा है कि लता जी ने गायन में पूर्णता हासिल कर ली है और उनकी गायिकी अद्भुत है। अख्तर ने कहा कि आमतौर पर कलाकार पूर्णता पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी सफल नहीं हो पाते, लेकिन लता मंगेशकर ने उसे हासिल कर लिया है। उनकी आवाज की पहुंच की कोई सीमा नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोग केवल लता के गाए गीतों को याद रखते हैं न कि उन फिल्मों को जिनसे वे गीत ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कहा कि आप को पता है कि हिंदी फिल्मों का संगीत हमारे जीवन में गहरे तक रचा बसा हुआ है। मुझे लगता है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय सिनेमा से अधिक हिंदी फिल्मी गीतों के सहारे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सन् 50 के दशक का एक वाकया सुनाया, जो उन्होंने पंडित जसराज से सुना था। पंडित जसराज एक बार उस्ताद बड़े गुलामअली खां से मिलने अमृतसर गए थे। बातचीत के दौरान उस्ताद ने अचानक उन्हें चुप रहने का इशारा किया। रेडियो पर अनारकली फिल्म का लता का गाया गीत आ रहा था ये जिंदगी उसी की है.. । गीत खत्म होने पर उस्ताद के मुंह से बरबस निकल पड़ा, कम्बख्त कभी बेसुरी होती ही नहीं। अख्तर ने कहा कि दरअसल यह एक पिता का स्नेह और एक कलाकार की ईष्र्या थी, जो उस्ताद के मुंह से निकल पड़ी।