दिल और दिमाग के साथ गाती है दीदी: आशा

दिल और दिमाग के साथ गाती है दीदी: आशा

नई दिल्ली। 80वां जन्मदिन मना रहीं अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बारे में मशहूर गायिका आशा भोंसले का कहना है कि सिंगर कोई बनाने से नहीं बनता। दीदी को भगवान ने भेजा है। उनका का हिंदी और उर्दू दोनों ज़ुबानों पर अधिकार है और वह दिल के साथ दिमाग को मिलाकर गीत गाती हैं।

आशा भोंसले ने कहा कि मैं आज जो भी कुछ हूं, दीदी की बदौलत हूं। जो लोग चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होते हैं वो मेहनत नहीं कर पाते। लता मंगेशकर उनके लिए मां के समान हैं क्योंकि मरते समय मां ने आशा भोंसले से कहा था कि लता ही अब तुम्हारा ख्याल रखेगी। करियर के शुरूआती दिनों के बारे में बताते हुए आशा ने कहा कि मैं और दीदी रिहर्सल के लिए मिनर्वा स्टुडियो जा रहे थे। स्टूडियो तक पहुंचने के लिए हमें दो बार ट्रेन बदलनी पड़ती थी। चिलचिलाती धूप थी और एक जगह सड़क पर डामर पिघला हुआ था, जिसमें दीदी की चप्पल फंस गई और पैर में भी डामर चिपक गया। लेकिन इसके बावजूद दीदी लंगड़ाते हुए स्टूडियो गई और अनिल बिस्वास के स्टूडियो में हमने रिहर्सल की। आशा भोंसले से जब यह पूछा गया कि लता मंगेशकर यदि आवाज की जादूगर नहीं होती तो क्या होतीं इसके जबाव में उन्होंने कहा कि दीदी का दिमाग बहुत ज्यादा तेज है। मां ने उन्हें पढ़ाया लिखाया होता तो वह किसी मंत्रालय में बहुत ऊंचे पद पर होतीं।

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