
नई दिल्ली। सामाजिक कुप्रथा बाल विवाह पर आधारित शो बालिका वधू के लेखक पूर्णेन्दु शेखर के अनुसार 16 साल पहले इसकी पटकथा मूल रूप से एक फिल्म के लिए लिखी गई थी। इन दिनों छोटे परदे पर सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले इस शो के लेखक शेखर ने कहा कि वर्ष 1992 में मैंने इसकी पटकथा मूल रूप से एक फिल्म के लिए लिखी थी जिसका शीर्षक एहसास रखा जाना था, लेकिन अपनी व्यस्तता की वजह से तब मैं किसी से संपर्क नहीं कर पाया। नतीजतन, यह कहानी किसी को सुना नहीं पाया।
धारावाहिक की मूल कहानी बालिका वधू आनंदी के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है जिसका विवाह हमउम्र जगदीश से हुआ है। उसके बाद से आनंदी का बचपन ससुराल वालों के रीति-रिवाजों के बंधन में बंधकर कहीं खो जाता है। इससे पहले शेखर सात फेरे, कुमकुम, अस्तित्व और साथी रे जैसे धारावाहिकों से जुड़े रहे हैं।