गीतों से देशप्रेम का उद्घोष करेंगी शुभा मुद्गल

गीतों से देशप्रेम का उद्घोष करेंगी शुभा मुद्गल

नई दिल्ली। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को सूफी एवं लोकगीतों के जरिए नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाली जानी मानी गायिका शुभा मुद्गल देशभक्ति पर आधारित लोकगीतों को स्वरबद्घ कर रही हैं और स्वाधीनता समर नाम से उनका नया एल्बम जल्द ही संगीतप्रेमियों के बीच देशप्रेम का उद्घोष करेगा।

शुभा मुद्गल ने बताया कि एक ही प्रकार के संगीत को सुनकर लोग क्षुब्ध हो चुके हैं और यह संगीतप्रेमियों के बीच नीरसता फैला रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मैं स्वाधीनता समर नाम से देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों का नया एल्बम तैयार कर रही हूं। मुझे विश्वास है कि यह लोगों को जरूर पसंद आएगा। उन्होंने कहा कि इस एल्बम में कुल आठ गीत हैं। इसमें एक गीत हम हैं हिन्दुस्तानी जाने माने शास्त्रीय गायक अनीमुल्ला खां ने गाया है। इसके अलावा विद्याधरी बाई तथा प्रीतलाल नागर के गीत को मैंने स्वरबद्घ किया है।

शुभा मुद्गल ने कहा कि इसे तैयार करने के दौरान कुछ ऐसे गीतों को लिया गया है, जो वर्र्षो पहले लोकगीतों के जरिए गुनगुनाए जाते रहे हैं, लेकिन आज की पीढ़ी के बीच यह गीत अनजाने हैं। उन्होंने ने कहा कि हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रति प्रारंभ से ही मेरा लगाव रहा है और बाद में सूफी गायिक में मेरी दिलचस्पी बढ़ गई। अली मोरे अंगाना और अब के सावन लोगों के बीच काफी सफल भी रही। उन्होंने कहा कि मैं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायिका हूं, लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि मैं दूसरे तरह की गायिकी को प्रोत्साहन नहीं देती। सभी तरह के गीतों का हमेशा से एक-दूसरे से संबंध रहा है, जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि सूफी केवल संगीत की एक विधा नहीं है, बल्कि यह एक विश्वास है जो आम आदमी और ईश्वर से संवाद का काम करती है। सूफी गायिकी हमेशा से मेरी पसंद रही है। शुभा मुद्गल ने कहा कि पाकिस्तान में संगीतकारों की पौध काफी प्रतिभाशाली है, लेकिन उन्हें भारत की तरह उचित प्रोत्साहन नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि मैंने पाकिस्तानी संगीत बैंड जुनून के संगीतकार सलमान अहमद के साथ धूम ताना एल्बम में गीत गाया है। अहमद के साथ इस एल्बम में मैंने जो गीत गए हैं वह हिन्दुस्तानी शास्त्रीय तथा सूफी संगीत का फ्यूजन है। टीवी पर टैंलेट शो से संबंधित एक प्रश्न के जवाब में शुभा ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि इससे बच्चों को प्रोत्साहन मिलता है, लेकिन बच्चों के लिए संगीत की सही शिक्षा जरूरी है।

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