
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ मनसे द्वारा छेड़े गए अभियान को चुनावी हथकंडा करार देते हुए प्रख्यात फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने कहा कि क्षेत्रीयता का यह दौर स्थायी नहीं है और वह इस विषय पर एक फिल्म बनाने का इरादा रखते हैं।
प्रख्यात फिल्मकार और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य बेनेगल ने कहा कि जो यह हो रहा है सब चुनाव जीतने के लिए किया जा रहा है, ताकि उनकी ताकत बढ़े। प्रख्यात फिल्मकार ने एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि जिन विषयों पर वह फिल्में बनाना चाहते हैं उनमें क्षेत्रीयता की बढ़ती समस्या भी एक विषय है। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे यहां से कुछ कह रहे हैं। जमशेदपुर में कल कोई और बात की जाएगी। इस प्रकार यह बाते विकराल होती जाएगी। लोगों के भीतर जो बुराई भरी है वह बाहर आ रही है। बेनेगल ने कहा कि हमारे समाज में आज जो हो रहा है हमें उसके कारणों पर भी विचार करना होगा। समाज में भारी असंतुलन हैं खासकर आर्थिक असंतुलन। हमारे समाज में सामंतवाद अपने तमाम चेहरों के साथ सामने आता है। इन सबको भी दूर करने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।
बेनेगल ने कहा कि यह उठा-पठक का दौर कुछ दिन तो चल सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र इन सबसे और मजूबत होकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जब तक हम यह नहीं समझते कि हम सब एक ही देश के हैं इस प्रकार की क्षेत्रीय भावनाओं से उबरा नहीं जा सकता। क्षेत्रीयता की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव, करूणानिधि, जयललिता जैसे कितने ही नेता है, लेकिन इन्हें सही मायनों में राष्ट्रीय नेता नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि उन्होंने अपने नजरिए को केवल एक क्षेत्र विशेष तक सीमित कर रखा है। उन्होंने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो इस समय केवल तीन ही नेता कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं जिनका नजरिया राष्ट्रीय है।
बेनेगल ने कहा कि कुछ लोगों को सोनिया की राष्ट्रीयता को लेकर आपत्ति हो सकती है, लेकिन उनके विरोधी भी यह नहीं कह सकते कि उनका नजरिया राष्ट्रीय नहीं है। इसी प्रकार वाजपेयी को कोई भी महज उत्तर प्रदेश या आडवाणी को गुजरात का नेता नहीं करार दे सकता। बेनेगल ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नजरिया भी पूरी तरह से राष्ट्रीय है। यह अलग बात है कि उनके समक्ष किसी क्षेत्र विशेष से चुनाव लड़ने की मजबूरी नहीं है।