
मुंबई। कॉमेडी फिल्मों के मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन की ताजा मलयाली फिल्म कांचीवरम आजादी से पहले के बुनकरों की स्थिति बयान करती है। प्रियदर्शन ने कहा कि मैंने अपनी ज्यादातर फिल्में दिमाग से बनाई हैं। दर्शकों की रुचियों का ख्याल रखते हुए उनमें कॉमेडी सहित सभी मसाले डाले, लेकिन मेरी यह फिल्म दर्शकों को हंसाती नहीं है। इसे मैंने दिल से बनाया है।
कांचीवरम गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के इंडियन पैनोरमा खंड में चुनी गई है। यह फिल्म साड़ी की बुनाई करने वाले उन बुनकरों की व्यथा दर्शाती है, जो दुनिया के लिए तो साड़ी बुनते हैं लेकिन अपनी ही बेटी की शादी में रेशम की साड़ी नहीं दे पाते। जिंदगी भर करघे पर रेशमी साडि़यों की बुनाई करने के बावजूद वह अपनी बेटियों और बीवी के लिए एक साड़ी तक जुटा पाने में असमर्थ होते हैं।
भारतीय परंपरा में विवाह और अंतिम संस्कार के समय रेशम का विशेष महत्व होता है। फिल्म बुनकरों के सहकारी संगठन के शुरुआत की कहानी भी कहती है। इसमें प्रकाश राज ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म के निर्माता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि अंग्रेजी सब टाइटल्स के साथ इसके प्रिंट महानगरों में रिलीज किए जाएंगे।