
नई दिल्ली। जाने-माने निर्माता-निर्देशक सुभाष घई मानते हैं कि किसी भी निर्देशक की किसी फिल्म को अगर रीमेक बनाने के लिए चुना जाए तो उसके लिए यह बहुत खुशी की बात होगी। लेकिन वह स्वयं अपनी किसी फिल्म का रीमेक बनाने के इच्छुक नहीं हैं।
सुभाष ने बताया कि किसी भी निर्देशक की कोई फिल्म अगर रीमेक बनाने के लिए चुनी जाती है, तो यह उस निर्देशक के लिए खुशी की बात होती है। जब भूषण कुमार ने मुझसे कहा कि वह कर्ज का रीमेक बनाना चाहते हैं, तो मुझे भी अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं था कि मैं उन्हें कर्ज का रीमेक बनाने से मना करता। मैंने उन्हें हां कह दिया। अगर मेरी अन्य फिल्मों का भी रीमेक बनाया जाएगा, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी। सुभाष घई ने कर्ज फिल्म 1980 में बनाई थी। उस दौर में यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। सुभाष घई को बॉलीवुड का शोमैन कहा जाता है। क्या यह शोमैन अपनी किसी फिल्म का रीमेक बनाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है। यह पूछे जाने पर कि उनकी कौन सी फिल्में ऐसी हैं, जिनका रीमेक बनाया जा सकता है। सुभाष ने कहा कि कर्मा, हीरो, खलनायक, सौदागर, ताल। कुछ फिल्में यादगार होती हैं और मुझे लगता है कि उनका रीमेक बनाया जा सकता है।
सुभाष अपनी नवीनतम फिल्म युवराज के बारे में कहते हैं कि यह एक बड़े बजट की फिल्म है और इसे बनाने में उन्होंने बहुत मेहनत की है। लेकिन उनकी राय है कि यह उनकी सर्वाधिक बड़ी फिल्म नहीं है। वह कहते हैं कि शायद अपने दौर में सौदागर बहुत बड़ी फिल्म थी। मैं कर्मा को भी गिनाना चाहूंगा। इससे पहले सुभाष घई की फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो गई थी। इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि 30 साल से अधिक लंबे फिल्मी करियर में ऐसा होना स्वाभाविक है। सफलता असफलता का दौर चलता रहता है। मैं अपना काम करता रहता हूं।
कर्ज, विधाता, हीरो, मेरी जंग, कर्मा, रामलखन और सौदागर फिल्म में सुभाष घई के निर्देशन का कौशल साफ झलकता है। सौदागर के लिए उन्हें फिल्म फेयर बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड मिला था। उनकी दो फिल्में परदेस, ताल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज हुई और अमेरिका में कई हफ्तों तक बॉक्स ऑफिस की शीर्ष 20 फिल्मों में बनी रहीं। लेकिन उनकी यादें और किसना बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। इसके बाद सुभाष ने निर्देशन छोड़ कर प्रोडक्शन का रुख किया। फिर आई ऐतराज (2004), 36 चाइना टाउन (2006), अपना सपना मनी-मनी (2006) जिनका कारोबार ठीक-ठाक रहा। लेकिन 2008 में आई ब्लैक एंड व्हाइट बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ गई। बहरहाल असफलताओं की ओर देखे बिना सुभाष घई अपने अगले प्रोजेक्ट की योजना बना रहे हैं।