नए निर्देशको का वर्ष रहा 2008

नए निर्देशको का वर्ष रहा 2008

मुंबई। वैश्विक मंदी, आतंकवाद, हिंसा और शेयर बाजार के धराशायी होने समेत विभिन्न समस्याओं को लेकर गहरे संकट में फंसे होने के बावजूद मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के लिए सन् 2008 उपलिब्धयों भरा वर्ष रहा। इस वर्ष नवोदित निर्देशकों ने अपनी कल्पनाशीलता से फिल्म इंडस्ट्री को समृद्ध किया।

यह वर्ष नए निर्देशकों के आगमन का वर्ष साबित हुआ। वर्ष 2008 में लगभग 20 नए निर्देशकों ने अपने आगमन से फिल्म इंडस्ट्री को समृद्ध बनाया। इन निर्देशकों में अब्बास टायरवाला, तरूण मनसुखानी, राजकुमार गुप्ता, जयदीप सेन, विवेक शर्मा और कुणाल देशमुख जैसे नई सोच और लीक से हटकर फिल्म बनाने वाले निर्देशकों का जादू दर्शकों के सर चढ़ कर बोला। इन निर्देशकों ने घिसी-पिटी परंपरा को तोड़ते हुए दर्शकों को नए-नए विषय पर आधारित फिल्मे दी, जो दर्शकों ने काफी पसंद की। कम बजट और दमदार विषय पर फिल्म बनाने में माहिर इन नवोदित निर्देशकों ने कहीं से भी यह अहसास नहीं होने दिया कि वे पहली बार फिल्म निर्देशित कर रहे हैं। वे दर्शकों पर अपना जादू चलाने में कामयाब रहे। वर्ष 2008 की हिट फिल्मों पर नजर डाले तो दोस्ताना, एक विवाह ऐसा भी, जन्नत, जाने तू या जाने ना, भूतनाथ, आमिर और क्रेजी 4 नए निर्देशकों की फिल्म थी, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता अर्जित की।

फिल्म उद्योग में सुपरहिट, हिट, सेमी हिट और फ्लॉप फिल्मों का चक्र वर्षो से चलता आ रहा है। करीब 20 वर्ष पहले सफल फिल्मों का प्रतिशत 40-50 रहा करता था, लेकिन यह आज घटकर 5-10 प्रतिशत रह गया है। अब तो बमुश्किल साल में महज पांच से दस फिल्में ही सफलता अर्जित कर पाती है, जिन्हें कमाई की दृष्टि से हिट या सुपरहिट मान लिया जाता है। वर्ष 2008 हिन्दी फिल्म उद्योग में कारोबार की दृष्टि से वर्ष 2007 की तुलना में अच्छा नही कहा जा सकता है। वर्ष में हिट फिल्मों की शुरूआत आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ऐश्वर्या राय, रितिक रोशन की फिल्म जोधा अकबर के साथ हुई। इसके बाद अब्बास-मुस्तान की सैफ अली खान, अक्षय खन्ना अभिनीत फिल्म रेस भी सफल हुई। फिल्म रेस की सफलता से सैफ न केवल दर्शकों के बल्कि फिल्म समीक्षकों के भी चहेते कलाकार बन गए। इसके बाद सिंह इज किंग, जाने तू या जाने ना, दोस्ताना, जन्नत, फैशन, सी कंपनी, गोलमाल रिर्टनस जैसी फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।

वर्ष 2008 में जहां कई फिल्मों ने सफलता का स्वाद चखा वहीं फ्लॉप फिल्मों की भी कमी नही रही। बड़े बजट और बड़े सितारों वाली कई फिल्मे एक-एक कर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती गई, जिसकी सूची काफी लंबी है। इनमें से युवराज, द्रोण, लव स्टोरी 2050, चमकू, टशन, गॉड तुस्सी ग्रेट हो, हल्ला बोल, महबूबा, मिशन इस्तानबुल और संडे जैसी बड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का जादू इस वर्ष भी सर चढ़कर बोला। इस वर्ष उनकी भूतनाथ, सरकार राज और द लास्ट लियर जैसी फिल्में प्रदर्शित हुई, जिसकी सफलता ने यह साबित किया कि बॉलीवुड में उनका राज अभी भी कायम है। रिमेक फिल्मों की श्रृंखला में इस वर्ष की अधिक लागत की फिल्मों में शुमार हिमेश रेशमिया की कर्ज प्रदर्शित हुई। गौरतलब है कि 1980 के दशक में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म कर्ज की रिमेक फिल्म में इस बार ऋषि कपूर की भूमिका संगीतकार से गायक और अब अभिनेता बने हिमेश रेशमिया ने निभाई, लेकिन फिल्म में शानदार लोकेशन, दमदार संगीत और अच्छी मार्केटिंग के बावजूद हिमेश अपने अभिनय का लोहा दर्शकों से नहीं मनवा पाए और यह फिल्म एक औसत कारोबार ही कर पाई।

नायकों की बात करें तो इस वर्ष भी अक्षय कुमार सफल अभिनेता की दौड़ में शाहरूख, आमिर, सलमान से कई कदम आगे नजर आए। वर्ष 2008 में अक्षय कुमार की सिंह इज किंग प्रदर्शित हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का नया कीर्तिमान बनाया। गौरतलब है वर्ष 2007 में भी उनकी नमस्ते लंदन, हे बेबी, भागम भाग और भूल-भुलैया जैसी फिल्में सुपरहिट हुई थी। रोमांटिक कॉमेडी पर आधारित फिल्म सिंह इज किंग में अक्षय कुमार ने एक भोले-भाले और हंसमुख सिख का किरदार निभाया और अपनी लाजवाब अदाकारी से न सिफ दर्शको का दिल जीता साथ ही सिंह इज किंग का नाम वर्ष 2008 की सबसे अधिक सफल फिल्म में भी दर्ज करा दिया और दशकों के बीच अपने को फिर से किंग साबित कर दिया। अक्षय कुमार के अलावा अभिषेक बच्चन, शाहरूख खान, सैफ अली खान, रितिक रौशन और रणवीर कपूर की फिल्मों को सफलता मिली जबकि इस वर्ष सलमान खान, संजय दत्त, अजय देवगन, अनिल कपूर, सन्नी देओल, बॉबी देओल, जैसे बड़े सितारे बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नही दिखा पाए। अभिषेक बच्चन की दोस्ताना, शाहरूख की रब दे बना दी जोड़ी, सैफ अली खान की रेस, रितिक रौशन की जोधा अकबर, रणवीर कपूर की बचना ऐ हसीनो सफल रही। इसके अलावे आमिर, ए वेडनेसडे, सी कंपनी, गोलमाल रिर्टनस, किस्मत कनेक्शन, क्रेजी 4, फूंक, रॉक ऑन, समर 2007 जैसी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर औसत सफलता अर्जित की। इस दौरान मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ किए जा रहे दु‌र्व्यहार को लेकर कमाल खान द्वारा निर्मित और अभिनीत फिल्म देशद्रोही ने कमजोर अभिनय और संगीत के बावजूद विवादस्पद विषय के कारण फिल्म ने उत्तर भारतीय क्षेत्रों में अच्छी सफलता अर्जित की।

वर्ष 2008 अभिनेत्रियों के लिए उपलब्धियों भरा वर्ष साबित हुआ। फिल्मों में शो पीस की परम्परा को तोड़ते हुए उन्होंने अपने शानदार अभिनय को लोहा मनवाकर स्थापित अभिनेताओं के लिए कड़ी टक्कर पेश की। फैशन, जोधा अकबर, सरकार राज जैसी फिल्मों के माध्यम से निर्माताओं ने अभिनेत्रियों के किरदार को सशक्त रूप से दर्शको के सामने पेश किया। अभिनेत्रियों में इस बार प्रिंयका चोपड़ा ने बाजी मारी। इस वर्ष उनकी फैशन और दोस्ताना जैसी फिल्मे सुपरहिट हुई। हांलाकि उनकी फिल्म द्रोण, चमकू, और गॉड तुस्सी ग्रेट हो बॉक्स ऑफिस पर सफल नही रही इसके बावजूद उन्होंने इन फिल्मों में अपने बेमिसाल अभिनय का लोहा मनवाया। मधुर भंडारकर की फिल्म फैशन के माध्यम से फैशन जगत के ग्लैमर, चमक और उनके शोहरत के साथ-साथ उनके निजी जिंदगी को भी बयां किया गया है। प्रियंका के अलावे ऐश्वर्या राय, कैटरीना कैफ, करीना कपूर, दीपिका पादुकोण, विपाशा बसु और विद्या बालन के लिए भी यह वर्ष अच्छा रहा जबकि प्रीति जिंटा, लारा दत्ता जैसी बड़ी अभिनेत्रियों के लिए यह वर्ष कुछ खास अच्छा नहीं कहा जा सकता है।

वर्ष 2008 में ऐश्वर्या राय की सरकार राज और जोधा अकबर जैसी फिल्में प्रदर्शित हुई। सरकार राज में उन्हें बिल्कुल नए अंदाज में पेश किया गया, जबकि जोधा अकबर में अपने बहुआयामी व्यक्तिव से ऐश्वर्या ने दर्शको को अपना दीवाना बना दिया। प्रियंका और ऐश्वर्या के अलावे अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ की (सिंह इज किंग), करीना कपूर की (गोलमाल रिटर्नस), दीपिका पादुकोण की (बचना ऐ हसीनो) और बिपाशा बसु की (रेस) जैसी फिल्में सफल रही।

निर्माता-निर्देशको मे इस बार भी यशराज बैनर ने बाजी मारी। इस वर्ष उनकी बचना ऐ हसीनो और रब दी बना दी जोड़ी जैसी फिल्में हिट हुई हालांकि उनकी फिल्म टशन बुरी तरह से फ्लॉप हो गई। इसके अलावे करण जौहर, रवि चोपड़ा, एकता कपूर, सूरज बड़जात्या, आमिर खान, महेश भटृ के बैनर तले बनी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा व्यापार किया। कुल मिलाकर देखे तो वर्ष 2008 फिल्म इंडस्ट्री के लिए कुछ खास अच्छा नही रहा। मुंबई बम विस्फोट, मंदी, टेलिविजन और डिश और पायरेसी की मार झेलने से फिल्म इंडस्ट्री पर गहरा असर हुआ साथ हीं आर्थिक मंदी के कारण फिल्म इंडस्ट्री के चोटी के कलाकारो को अपनी कीमत घटाने पर मजबूर किया।

देखा जाए तो वर्ष 2008 में पाया कम और खोया ज्यादा। वर्ष 2008 में बीर. आर.चोपड़ा, महेन्द्र कपूर, राजेन्द्र नाथ, एफ सी मेहरा और विजय तेंदुलकर जैसी महान हस्तियां भी हिंदी सिनेमा के क्षितिज से एक-एक कर लुप्त होते चले गए। इन सितारों के जाने से फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा सन्नाटा छा गया जो आने वाले कई वर्ष तक हमें महसूस होता रहेगा। साल के अंतिम सप्ताह में पिछले वर्ष के सबसे सफल अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म जंबो और आमिर खान की फिल्म गजनी प्रदर्शित हो रही है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इस बार भी आमिर और अक्षय कुमार अपने अभिनय से दर्शको को भरपूर मनोरंजन कर सकेगें।

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