
काठमांडो। प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी ने आज लाखों एचआईवी संक्रमित लोगों पर लगे कलंक और भेदभाव के खिलाफ दक्षिण एशियाई देशों के बीच ज्यादा एकता और सहयोग की जरुरत पर बल दिया।
श्रीलंकाई क्रिकेटर सनत जयसूर्या के साथ एचआईवी एड्स पर दक्षेस सौहार्द दूत शबाना ने पशुपतिनाथ मंदिर विवाद के बावजूद नेपाल की अपनी तीन दिवसीय यात्रा की जबकि बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।
अभिनेत्री ने आज नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री गिरिराज मणि पोखरेल से मुलाकात की और एचआईवी रोकथाम और एड्स पीडि़त लोगों के पुनर्वास के मुद्दे पर विचार विमर्श किया। बीमारी के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए कल यहां पहुंची शबाना ने कहा एड्स से मुकाबला करने के क्षेत्र में नेपाल द्वारा की गयी प्रगति को देखकर मैं बहुत खुश हूं। उन्होंने कहा एड्स सिर्फ चिकित्सकीय समस्या नहीं है इसका सामाजिक सांस्कृतिक संबंध भी है और इस मुद्दे पर लैंगिक भेदभाव भी है।
उन्होंने यहां एक सम्मेलन में कहा महिलाओं का सशक्तिकरण किया जाना चाहिए और घातक बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए एचआईवी से जुड़े सभी प्रकार के भेदभाव समाप्त किये जाने चाहिए।
इश्क इश्क इश्क फिल्म की शूटिंग के लिए देवानंद के साथ 1971 की अपनी पहली नेपाल यात्रा को याद करते हुए शबाना ने कहा देश के साथ मेरा बहुत लंबा और सुंदर संबंध है तथा कोई व्यक्ति यदि मेरे साथ यहां फिल्म शूट करने की योजना बनाता है तो मैं नेपाल आने में कतई देर नहीं करूंगी।
शबाना ने कहा कि दक्षिण एशिया में करीब 25 लाख लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं और उनमें से 24 लाख लोग भारत में ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में 70 हजार एचआईवी एड्स संक्रमित लोग हैं। नेपाल के अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान शबाना ने समाज के विशेष तौर पर महिलाओं सहित गरीब और वंचित तबके के लिए सेवाओं में सुधरी पहुंच बहुक्षेत्रीय समन्वय और जमीनी स्तर पर काम करने की जरुरत पर बल दिया।
शबाना आज प्रधानमंत्री प्रचंड से भी मुलाकात करेंगी जो राष्ट्रीय एड्स परिषद के अध्यक्ष हैं। अभिनेत्री ने उत्तरी काठमांडो के बंधानिकंठा में केतकी केंद्र का दौरा किया और वहां बच्चों से बातचीत की। वह सनोथिमि स्थित दक्षेस तपेदिक और एचआईवी एड्स केंद्र का भी आज दौरा करेंगी ताकि इसकी गतिविधियों की जानकारी हासिल कर सकें। शबाना ने बताया कि उन्होंने एचआईवी एड्स केबारे में जागरुकता फैलाने के लिए एक दशक से ज्यादा समय पहले बांग्लादेश और भारत में कुछ फिल्में भी बनायी थीं।