
मुंबई। महानायक अमिताभ बच्चन कहते हैं कि पूरी दुनिया में हर दिन किसी न किसी के लिए खास होता है। हर रोज कहीं कुछ लोग नई जिंदगी के जन्म का जश्न मनाते हैं तो कहीं कुछ लोग अपनों की विदाई का मातम और कहीं शहनाईयां बजती हैं। जिंदगी इसी तरह चलती रहती है। इसी का नाम जीवन है।
महानायक अमिताभ ने अपने पिता की पुण्यतिथि पर उनकी यादों को लेकर कुछ इसी तरह से दार्शनिक उद्गार अपने ब्लॉग में व्यक्त किये हैं। अपनी इन्हीं भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उन्होंने अपने पिता और महान कवि हरिवंशराय बच्चन की पंक्तियां कुछ दोहराई हैं-
मिट्टी का तन
मस्ती का मन
क्षणभर जीवन मेरा परिचय।
अमिताभ ने 18 जनवरी को दोपहर बाद लिखे अपने ब्लॉग में कहा है कि आज मेरे पिता की पुण्यतिथि है। उनकी याद बेहद सता रही है। कुछ इसलिए भी ज्यादा उनकी याद आ रही है क्योंकि परिवार केअधिकतर सदस्य मेरे आसपास नहीं हैं। वह कहते हैं कि पेरिस से लंदन और फिर मुंबई के सफर में रातभर मैं अपने पिता की यादों में डूबा रहा।
अपने बंगले प्रतीक्षा पर कल सुबह अमिताभ ने उठकर अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए कुछ समय प्रार्थना की। वह लिखते हैं मैं उनके कमरे में बैठा रहा। रामायण और गीता पढ़ी। ठीक उसी तरह से जैसे वह हर सुबह पढ़ते थे। उनका आशीर्वाद लेने के लिए हर रोज की तरह फोटो में मैंने उनके चेहरे को छुआ। कुछ क्षण वहां खड़ा रहा जैसे उस रात खड़ा था। उन अंतिम क्षणों की वह सिहरन फिर से हुई जब वह हमें छोड़कर चले गए थे। उसके बाद फिर से दिन शुरु हो गया।
अमिताभ लिखते हैं आज कोई जन्मदिन मनाता है कोई वर्षगांठ कोई शादी। शाम को हमें भी किसी समारोह में जाना है...वक्त का पहिया हमारी जिंदगी की तरह बिना रुके घूमता रहता है। अमिताभ लिखते हैं पिताजी मुझे आपकी याद आ रही है...और आप हर क्षण मेरे साथ रहते हैं।