पिंकी ने सीखा.. हाय हैलो बोलना

पिंकी ने सीखा.. हाय हैलो बोलना

लखनऊ। आस्कर के लिए नामित वृत्तचित्र स्माइल पिंकी की नायिका पिंकी को अब हाय हैलो और विदेशियों से मिलने के तौर-तरीके सीख रही है।

22 फरवरी को लास एंजिलिस में होने वाले आस्कर समारोह में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित की गई पिंकी और उसके पिता राजेंद्र सोनकर को विदेशियों के साथ मिलने और व्यवहार के तरीके सिखाए जा रहे हैं। बेचारे राजेंद्र सोनकर अब तक दातून किया करते थे, लेकिन उन्हें दांत साफ करने के लिये टूथब्रश और टूथपेस्ट पकड़ा दिया गया है। दोनों बाप बेटी का होमवर्क जारी है, इसलिए उन्हें सामान्य तौर तरीके सिखाए जा रहे हैं।

पिंकी के कटे होंठ को ठीक करने वाले वाराणसी के डा. सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि अमेरिका जाने के पहले दोनों को विदेशियों के सामान्य तौर तरीके सिखाए जा रहे हैं। दोनों को आस्कर समारोह में हिस्सा लेने के लिए 18 फरवरी को दिल्ली से लास एंजिलिस की उड़ान पकड़नी है। डाक्टर सिंह ने कहा कि पिंकी अब हाय हैलो और थैंक यू बोलना सीख गई है, वह तो अब लोगों से हाथ भी मिलाने लगी है। लास एंजिलिस में चूकि ठंड होती है और आस्कर समारोह में सूट पहनना अनिवार्य होता है, इसलिए पिंकी के लिए गर्म कपडे़ तो उसके पिता राजेंद्र के लिए सूट तैयार करा दिए गए हैं। दोनों के कुछ और कपड़ों की खरीददारी लास एंजिलिस में ही होगी। दोनों को चम्मच-कांटे से खाना तथा टेबल पर बैठ कर खाने के तरीके भी बताए गए हैं। कटे होंठ वाली पिंकी को नया जीवन देने वाले डाक्टर सिंह ने आमंत्रण मिलने के बाद पिंकी और उसके पिता के जहाज के टिकट का इंतजाम किया है। पिंकी के लिए लास एंजिलिस में भी कपडे़ तैयार किए जा रहे हैं और उसकी फिटिंग का ब्यौरा पहले ही भेजा जा चुका है। लास एंजिलिस में दोनों के ठहरने की व्यवस्था पांच सितारा होटल फोरसीजंस में की गई है।

स्माइल पिंकी फिल्म की निर्देशक मेगन मायलन ने पिंकी और उसके मजदूर माता-पिता को आस्कर समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। इस फिल्म को आस्कर में सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र में नामित किया गया है। उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के नक्सल प्रभावित विंध्य इलाके के पुरवा खोरवा गांव में नौ साल पहले पैदा हुई पिंकी गांव के लोगों के लिए हास्य का पात्र थी तो अपने परिवार के लिए दुख का कारण। वजह थी उसके होठों का कटा होना जो पैदायशी था। वह ठीक से बोल नहीं पाती थी और न हंस पाती थी।

सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सिंह ने उसका इलाज कराया और वाराणसी के चिकित्सक सुबोध कुमार सिंह ने उसका नि:शुल्क आपरेशन किया। आपरेशन के बाद पिंकी कटे होठों के अभिशाप से मुक्त हो गई और कुछ दिन बाद सामान्य बच्चों की तरह खेलने, हंसने, बोलने और मुस्कुराने लगी। इस पूरे वाकये पर ब्राजील की वृत्तचित्र निर्माता निर्देशक मेगन मायलन ने 39 मिनट का लघु वृत्तचित्र स्माइल पिंकी बनाया जो आस्कर के लिए नामित किया गया और अब द फायनल मैच तथा द विटनेस फ्राम बालकनी के साथ पुरस्कार के अंतिम दौड़ में है। फिल्म में दिखाया गया है कि ठीक होने के बाद कैसे बच्ची का आत्मविश्वास लौटता है। आस्कर पुरस्कार की घोषणा 22 फरवरी को होगी। फिल्म स्माइल पिंकी ऐसे अभिभावकों के लिए भी एक सीख है, जिनके बच्चे ऐसी बीमारी के साथ पैदा होते हैं। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि ऐस बच्चों के साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिए ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। फिल्म में पिंकी ने ही मुख्य भूमिका अदा की है और पूरी फिल्म का लोकेशन भी गांव के आसपास का ही है।

पिंकी अपने पिता की दूसरी संतान है। दो माह पहले जब वह बीमार पड़ी तो उसके मजदूर पिता के पास उसके इलाज के पैसे नहीं थे। नक्सल प्रभावित विंध्य पर्वतमाला की तलहटी में बसा पुरवा खोरिया गांव अति पिछड़ा है जहां बिजली पानी की भी सुविधा नहीं है, लेकिन स्माइल पिंकी ने गांव की सूरत बदलने का मौका दे दिया है। कुछ दिन पूर्व ही राज्य सरकार ने पुरवा खोरिया गांव और पिंकी को गोद लेने का फैसला किया। सरकार अब पिंकी की शिक्षा की पूरी व्यवस्था करेगी और अति पिछड़े इस गांव का कायाकल्प कर मौलिक सुविधाएं मुहैया कराएगी। गांव में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल के साथ विधवा पेंशन समेत दस सूत्रीय कार्यक्रम को जल्द ही पूरा किया जाएगा। इसकी कार्ययोजना बनाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं।

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