
मुंबई। मायानगरी बॉलीवुड के ग्लैमरस चेहरे पर इन दिनों मायूसी की परत चढ़ गई है। सपने बेचने वाला यह उद्योग एक ओर जहां फिल्म निर्माताओं और मल्टीप्लेक्स मालिकों के बीच टकराव से हलकान है, वहीं भावी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैचों की दीवानगी के इसी महीने टीवी पर लौटने से सिनेमा घरों में रौनक कम होने का खतरा भी उसे सता रहा है।
कई फिल्मी हस्तियां और निर्माता तो इसे हाल के वर्षोमें बॉलीवुड के लिए सबसे बुरा दौर मानते हैं। अपनी फिल्म जेल की शूटिंग में व्यस्त जाने-माने प्रयोगधर्मी निर्देशक मधुर भंडारकर कहते हैं कि बॉलीवुड को ऐसे दौर से पहले कभी नहीं गुजरना पड़ा था। यह बेहद कठिन दौर है। जनवरी से मार्च तक घटिया फिल्मों का दौर रहा और अब प्रोड्यूसरों ने हड़ताल का आह्वान कर दिया है। मई में आईपीएल छाया रहेगा। यह मायूसी का दौर है। हाल के कुछ महीनों में अधिकांश बड़ी फिल्में बॉक्स आफिस पर औंधे मुंह गिरीं। इनमें चांदनी चौक टू चायना, बिल्लू बार्बर, दिल्ली 6 प्रमुख रूप से शामिल हैं।
डेव डी और राज- द मिस्ट्री को सफलता तो मिली पर यह इतनी बड़ी सफलता नहीं थी कि बॉलीवुड के नुकसान की भरपाई हो सके। अपनी फिल्म हाउसफुल बनाने में व्यस्त साजिद खान कहते हैं कि बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्मों की जरूरत है। लोगों को उत्कृष्ट और नायाब कहानियां पर आधारित फिल्में परोसकर ही भीड़ जुटाई जा सकती है। एक फिल्म वितरक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि बॉलीवुड संकट में है। मल्टीप्लेक्स मालिकों और निर्माताओं का संघर्ष अहम का टकराव बन गया है। यह टकराव लंबा खिंच सकता है।