अगर जुआ खेलना बीमारी या नशा बन जाए तो..

अगर  जुआ खेलना बीमारी या नशा बन जाए तो..

़मकाऊ। निश्चित ही मकाऊ की मुख्य आमदनी जुए से होती है। शहर के हर बड़े-छोटे होटलों में कैसिनो बने हुए हैं। इन कैसिनो में अपनी हैसियत और शौक से दांव लगाने वालों का तांता लगा रहता है। व्यस्त घड़ी में तो सीट के लिए इंतजार भी करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि केवल विदेशी पर्यटक और मेहमान ही दांव लगाते हैं। स्थानीय, हांगकांग और चीन की मुख्यभूमि से आए चीनियों की तादाद कम नहीं रहती। 5 सेंट से 5 करोड़ तक का दांव लगाया जा सकता है और खेल के नियमों के हिसाब से दांव पर लगायी गयी रकम दोगुनी से 50 गुनी तक हो सकती है। बगैर मेहनत के पैसों का बढ़ा हुआ गुणनफल ऐसा लालायित करता है कि कमाऊ आया हर व्यक्तिअपनी किस्मत आजमाने से बाज नहीं आता। कुछ अपवाद हो सकते हैं।

एक तरफ जुए पर आधारित अर्थ व्यवस्था तो दूसरी तरफ जुए को लेकर एक सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह भी किया जाता है। कोशिश रहती है कि पेशेवर जुआरियों या जुआ खेलने के आदी हो चुके लोगों को सुधारा जाए। दस लक्षण बताए गए हैं। अगर इनमें से पांच भी किसी व्यक्ति में पाए जाते हैं तो उसके जुआ खेलने को समस्या समझा जाता है। ये दस लक्षण हैं-

1. सोचे गए समय से ज्यादा देर तक खेलना

ृ2. अंतिम कौड़ी गंवाने तक खेलना

3. जुआ खेलने की वजह से नींद नहीं आना

4. बिलों का समय पर भुगतान नहीं करना और आय एवं बचत की राशि को दांव पर लगाना

5. न खेलने की कोशिश में असफल रहना

6. जुआ खेलने के लिए कर्ज लेना

7. जुए के लिए पैसा जुटाने के उद्देश्य से कानून तोड़ना या उसके बारे में सोचना

8. जुए में हुए नुकसान से हताश होना या आत्महत्या करने के बारे में सोचना

9. खेलने के बाद पश्चातान करना

10. जुआ इसलिए खेलना कि पैसे जीत कर आर्थिक जरूरतें पूरी होंगी

इन दस लक्षणों में से पांच भी किसी व्यक्ति में पाए जाते हैं तो उसे और उसके परिजनों को तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। मकाऊ की सरकार और स्वैच्छिक संस्थाएं इस दिशा में कार्य करती हैं।

-अजय ब्रह्मात्मज

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