बिग बी को भी पड़ती है फटकार

बिग बी को भी पड़ती है फटकार

नई दिल्ली। लाखों करोड़ों लोगों के पसंदीदा अमिताभ बच्चन को अपनी कही बातों के लिए इन दिनों प्रशंसकों की फटकार का भी सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह पूरे धैर्य के साथ उसका जवाब दे रहे हैं।

विदेशों के मुकाबले भारत में उत्कृष्ट शिक्षा संस्थानों के मुद्दे पर हाल में अपने ब्लाग में बेबाकी से राय रखने और देश में ऐसी संस्थाओं की अनुपलब्धता पर सवाल उठाने वाले मेगास्टार को प्रशंसकों के चुभते सवाल का सामना करना पड़ा है। कुछ प्रशंसकों ने तो उनसे यह तक सवाल किया कि जब इतना ही था तो उन्होंने अपने पुत्र अभिषेक और पुत्री श्वेता को पढ़ने के लिए स्विटजरलैंड क्यों भेजा?

अमिताभ ने इस तीखे सवाल का जवाब अपनी करुण स्थिति बयां करते हुए दिया और कहा कि बच्चों को सामान्य जीवन देने के लिए उन्हें मजबूरन ऐसा करना पड़ा। बिग बी ने जवाब दिया कि सार्वजनिक हस्ती की संतान भी सुर्खियां बन जाती है। उन्होंने लिखा है कि वह और उनकी पत्नी जया हमेशा से यही चाहते थे कि उनके बच्चे सामान्य माहौल में पले बढ़ें। उन्होंने लिखा है, लेकिन चाहने से कुछ नहीं होता। हो सकता है कि हम गलत हों। बिग बी ने लिखा है कि सार्वजनिक हस्ती की संतान होने के कारण उनके बच्चों श्वेता और अभिषेक को कुछ सकारात्मक भी मिलता है तो कुछ नकारात्मक भी। इसीलिए उन्हें पढ़ने के लिए बाहर भेजना पड़ा, ताकि वह सामान्य माहौल में बड़े हो सकें। वहां.. जहां हमारे बारे में कोई नहीं जानता था।

अमिताभ ने 1982 की घटना का जिक्र किया है जिन दिनों कुली फिल्म की शूटिंग करते हुए वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में थे। तब अभिषेक और श्वेता क्रमश: छह और आठ साल के थे। कुली फिल्म की दुर्घटना के बाद अस्पताल में मासूम अभिषेक द्वारा पूछे सवाल का जिक्र करते हुए अमिताभ ने लिखा है, पीड़ा और दुख से गुजर रहा पिता उस समय अस्पताल में अपना निर्भीक चेहरा दिखाता है, जब उसका छह साल का पुत्र पूछता है कि उसके सिर और पेट के ऊपर इतनी बोतलें क्यों लटक रही हैं तो वह कहता है कि ये सभी पतंगें हैं जिन्हें वह उड़ा रहे हैं। यह सबसे त्रासद कहानी है जो मैं कभी नहीं चाहूंगा कि किसी पिता को अपने बच्चों से सामना करना पड़े। लेकिन इससे भी बुरी स्थिति आनी थी। उन दिनों अमिताभ के स्वास्थ्य के बारे में अस्पताल की नियमित हेल्थ बुलेटिन अखबार के पहले पन्ने की खबर होती थी।

अमिताभ ने लिखा है, एक दिन सुबह स्कूल में अभिषेक के एक सहपाठी ने उससे पूछा ..तुम्हारे मरने जा रहे हैं.. नहीं। अमिताभ ने कहा कि अभिषेक के दिमाग पर इस बात का क्या प्रभाव पड़ा, यह बताना मुश्किल है। उसकी चंचलता खो गई और वह खामोश रहने लगा। अपनी कक्षा में पहले तीन में रहने वाले बच्चे का प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ और वह बिल्कुल निचले रैंक पर पहुंच गया।

अमिताभ के अनुसार, इस घटना सहित तमाम बातों ने उन्हें बच्चों को दूर रखने के लिए मजबूर कर दिया जिसकी वजह से उन्हें विदेश भेजा गया। अपनी पत्नी जया बच्चन के समक्ष मौजूद चुनौतियों और बेबसी का भी शहंशाह ने जिक्र किया है और लिखा है, एक मां इतने छोटे बच्चों को क्या समझाती.. उनके पिता को क्या हुआ है, वह बच्चों के साथ घर पर क्यों नहीं हैं। तब आईसीयू में लगभग कोमा की स्थिति में पड़ा पिता अपने बच्चों से क्या कहता कि जब वह आईसीयू आते हैं तब उनके साथ क्या होता है। तब मां पति के जीवित रहने या न रहने के संशय के बावजूद हंस कर बच्चों को यह बताने का प्रयास करती थी कि सब कुछ ठीक है।

अमिताभ ने हाल ही में अपने ब्लाग में शिक्षा के बारे में लिखा था कि जब ज्ञान सर्वव्यापी है तो ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज, आईवाई और स्विटजरलैंड को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष दर्जा क्यों दिया जाता है।

ब्लाग पर आए सवालों के जवाब में अमिताभ ने लिखा है, मुझे लगता है कि स्लमडाग मिलियनेयर सिंड्रोम एक बार फिर उभर आया है, क्योंकि बहस की भावना और विश्लेषण का जो अर्थ निकाला गया है, मेरा अभिप्राय उससे बिल्कुल अलग है।

गौरतलब है कि डैनी बोयल की फिल्म स्लमडाग मिलियनेयर को आठ आस्कर अवार्ड मिलने के बाद अमिताभ ने लिखा था कि इस फिल्म में जो गरीबी दिखाई गई है, वह केवल भारत में ही नहीं है, बल्कि अन्य कई देशों में है। लेकिन अब भारतीय सिनेमा विश्व मंच पर अपनी जगह बना रहा है। तब अमिताभ की यह कह कर आलोचना की गई थी कि उन्होंने इस फिल्म में देश की गरीबी दिखाए जाने की आलोचना की है। अमिताभ ने अपने प्रशंसकों से अपना पिछला ब्लाग एक बार फिर पढ़ने का अनुरोध किया है।

बिग बी ने लिखा है, मेरा सवाल था कि जब ज्ञान सर्वव्यापी है तो ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज, आईवाई और स्विटजरलैंड को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष दर्जा क्यों दिया जाता है। मैंने यह सवाल बिल्कुल नहीं किया कि लोग [मैं भी] वहां क्यों जाते हैं और वहां क्यों पढ़ाई करते हैं। उन्होंने लिखा है, यह मानव का स्वभाव है। एक खास, एक्सक्लूसिव स्टोर में रखी किसी शर्ट को वे लोग खरीदेंगे जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। यहां यह नहीं देखा जाएगा कि शर्ट कितनी महंगी है। लेकिन अगर वही शर्ट किसी साधारण मॉल में मिलेगी तो उसकी कीमत और महत्व दोनों में ही फर्क पड़ेगा। भले ही शर्ट का कपड़ा वही हो, लेकिन एक्सक्लूसिव रिटेल का करिश्मा अपना असर दिखा जाता है। शर्ट तो पहनने के लिए खरीदी जाती है।

बिग बी ने आगे लिखा है, यही बात शिक्षा के लिए लागू होती है। ऐसा नहीं है कि हावर्ड में पढ़ने पर ओम् का सिद्धांत बदल जाएगा या न्यूटन की परिकल्पना में अंतर आ जाएगा। यह जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे। मैं जानना चाहता हूं कि एक ही सिद्धांत को पढ़ाने के लिए अलग अलग माहौल क्यों हैं।

अमिताभ ने लिखा है कि वह और उनके जैसे कई लोग यह सवाल करते हैं। कई लोग असहमत होते हैं। लेकिन उनका उद्देश्य केवल एक बहस की शुरूआत करना और लोगों की राय जानना था।

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