
मुंबई। कश्मीरी मूल के नवोदित फिल्मकार तारिक तापा ने कश्मीर पर फिल्म जीरो ब्रिज बनाने के साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा है। कश्मीर पर बनी फिल्मों के आतंकवाद के इर्द-गिर्द घूमने से तंग आ चुके तारिक की यह फिल्म कश्मीरी जीवन और वहां केलोगों की कहानी बयान करती है।
तारिक ने कहा, हाल के समय में कश्मीर पर बनी प्रत्येक फिल्म में आतंकवाद का किसी न किसी तरह से उल्लेख होता है। मैं कश्मीरी लोगों और उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनाना चाहता था। तारिक ने अमेरिका से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अध्ययन किया है।
तारिक की फिल्म जीरो ब्रिज का शनिवार को मुंबई फिल्म फेस्टीवल (एमएफएफ) में प्रदर्शन हुआ। यह फिल्म एक लड़के दिलवारा की कहानी है जो श्रीनगर के बाहरी इलाके में अपने पिता के साथ रहता है। स्वभाव से बागी दिलवारा अपने वर्तमान जीवन को पसंद नहीं करता और चुपके से अपनी मां के पास दिल्ली जाने की योजना बनाता है।
29 अक्टूबर से पांच नवम्बर तक चलने वाले 11वें एमएमएफ में फिल्म जीरो ब्रिज के लिए तारिक का नाम नवोदित निर्देशकों की अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में नामित किया गया है। नौ महीने में बनी इस फिल्म का निर्देशन और संपादन तारिक ने ही किया है। इमरान तापा ने फिल्म में मुख्य भूमिका की है।
कश्मीरी मूल के तारिक का जन्म और परवरिश न्यूयॉर्क में हुई है। इस फिल्म के लिए उन्होंने गहन शोध किया था। हिलाल अहमद ने फिल्म का निर्माण किया है। उन्होंने फिल्म के ज्यादातर हिस्सों का अंग्रेजी से उर्दू में अनुवाद किया है। अहमद का कहना है कि फिल्म के ज्यादातर कलाकार अशिक्षित है और वह संवादों को समझ सकें इसलिए मैंने यह अनुवाद किया।