फिल्मों पर ना चले सेंसर की कैंची: अनुराग कश्यप

फिल्मों पर ना चले सेंसर की कैंची: अनुराग कश्यप

मुंबई। बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप महसूस करते हैं कि फिल्मों पर सेंसर की कैंची नहीं चलनी चाहिए। यद्यपि उनका कहना है कि देश में वास्तविक जीवन के राजनेताओं की आलोचना पर केंद्रित फिल्में बनाया या ऐसी फिल्म जिसमें सेक्स शब्द का प्रयोग हो, बनाना आसान नहीं है।

देव डी जैसी प्रयोगात्मक फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले कश्यप ने 11वें मुंबई फिल्म महोत्सव के दौरान कहा, फिल्म निर्माण पर सेंसर का किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। हम अब भी सेक्स शब्द के प्रयोग के प्रति दकियानूसी सोच रखते हैं। उन्होंने कहा, मैं अपनी सीमाओं को तोड़ने की कोशिश करता हूं ताकि फिल्म में सब कुछ वास्तविक दिखाई दे।

ब्लैक फ्राईडे और गुलाल जैसी फिल्मों के साथ हमेशा वास्तविक जीवन की घटनाओं का चित्रण करने वाले कश्यप कहते हैं कि वह शायद ही कभी गैबरिएल रेंज की डेथ ऑफ ए प्रेसीडेंट जैसी फिल्म बना सके। डेथ ऑफ ए प्रेसीडेंट ऐसे समय में बनी है जब राष्ट्रपति जॉर्ज बुश जीवित हैं लेकिन हम फिल्म में एक ऐसा दृश्य नहीं डाल सकते, जहां चाय की चुस्कियां लेते चार लोग राजनेता राज ठाकरे को कोस रहे हों। 37 वर्षीय फिल्मकार मंदी के दौर को बॉलीवुड के लिए अच्छा मानते हैं। कश्यप कहते हैं, मंदी की वजह से बॉलीवुड अपने आकार में आ गया है। अतिरिक्त खर्च फिल्म निर्माण के वास्तविक खर्च से अधिक होते थे। मंदी के समय में अतिरिक्त खर्च को कम करने में मदद मिली है। वह मानते हैं कि कुछ निर्माता निर्भीक और लीक से हटकर फिल्में बनाते हैं।

कश्यप ने कहा, नए विचारों का खतरा उठा सकने वाले निर्माताओं की बेहद कमी है। ज्यादातर निर्माता व्यापारी हैं और वे फिल्म में लगाए पैसे की वापसी चाहते हैं। इसलिए वे फिल्मों में तभी पैसा लगाते हैं जब उन्हें लगता है कि कहानी बिक सकेगी।

उन्होंने कहा, मैं हमेशा कम बजट की फिल्में बनाता हूं, इसलिए यूटीवी ने नौ फिल्मों के लिए मेरे साथ करार किया है। कश्यप की आने वाली फिल्म उड़ान की शूटिंग पूरी हो चुकी है।

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