गुणवत्तापूर्ण बाल फिल्में चाहती हैं नंदिता

गुणवत्तापूर्ण बाल फिल्में चाहती हैं नंदिता

हैदराबाद। जानी मानी अभिनेत्री और चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया (सीएफएसआई) की अध्यक्ष नंदिता दास का मानना है कि सर्वाधिक फिल्में बनाने में विशिष्ट योग्यता पाने के बावजूद भारतीय फिल्म उद्योग गुणवत्तापूर्ण बाल फिल्में बनाने में विफल रहा है। हाल ही में सीएफएसआई प्रमुख का पद संभालने वाली नंदिता ने यहां कहा ईरान और चीन जैसे देश भी बाल सिनेमा में नए मानक स्थापित कर चुके हैं लेकिन बड़ी संख्या में फिल्में बनाने के बावजूद भारतीय फिल्म जगत इस क्षेत्र में पिछड़ रहा है। अपने एजेंडे को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर वह गुणवत्ता फिल्मों में इस दूरी को भरना चाहती हैं। तीन साल के कार्यकाल में यह उनकी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल होगा।

फिल्म निर्माता ने कहा संख्या नहीं बल्कि गुणवत्ता मायने रखती है। सीएफएसआई ने बहुत सी फिल्में बनाई हैं। हमारे पास लाइब्रेरी में 300 से अधिक फिल्में हैं जिनमें से 150...200 फिल्मों का निर्माण सीएफएसआई ने किया है। फिल्में बनाना ही पर्याप्त नहीं बल्कि बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की फिल्में बनाई जानी चाहिए। अपने इस काम के लिए नंदिता बाल फिल्में बनाने वाले अच्छे निर्माताओं की तलाश में हैं।

उन्होंने कहा मैंने पटकथा समिति को भी बदल दिया है। पटकथा के लिए हमें अछे लोग मिल रहे हैं क्योंकि पटकथा किसी भी फिल्म की रीढ़ होती है। इस साल हम बेहतर फिल्में बनाने की उम्मीद करते हैं।

नंदिता ने कहा मैं फिल्मों की संख्या भी कम करने की कोशिश कर रही हूं जो हम बनाते हैं लेकिन बेहतर गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं जिसके लिए हम मुख्य धारा के कई फिल्म निर्माताओं से बात कर रहे हैं। अभिनेत्री ने मुख्य धारा के फिल्म निर्माताओं के बाल सिनेमा पर ध्यान केंद्रित न किए जाने पर भी चिंता जताई। नंदिता ने कहा विश्वभर में आप बच्चों की बहुत सी फिल्में देखते हैं और इनकी बड़ी मांग भी है। लेकिन भारत में पर्याप्त बाल फिल्में नहीं दिखतीं।

उन्होंने कहा कि 14 से 20 नवम्बर तक यहां आयोजित होने जा रहा 16वां बाल फिल्म समारोह इस थीम के लिए एक खुला मंच होगा कि भारत में बाल फिल्में अदृश्य क्यों हैं? देश में समानांतर सिनेमा से जुड़ी नंदिता आलोचकों की सराहना पा चुकी फायर (1996) अर्थ (1998) और बवंडर (2000) जैसी बहुत सी फिल्मों में अभिनय कर चुकी हैं। उनके निर्देशन वाली फिल्म फिराक (2008) फ्रांस सरकार के आर्डर आफ आ‌र्ट्स एंड लेटर्स सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते।

नंदिता ने फिल्म सोसायटी में अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान किसी बाल फिल्म का निर्देशन करने की किसी योजना से इंकार किया। उन्होंने कहा यदि मैं कोई बाल फिल्म करती हूं तो लोग कह सकते हैं कि मैं अध्यक्ष पद का दुरुपयोग कर रही हूं। यह मेरे लिए सीखने की एक प्रक्रिया है।

अभिनेत्री ने कहा मुझे पूरी उम्मीद है कि इन तीन सालों के बाद मैं निश्चित तौर पर प्रेरित हूंगी और आशा है कि आप बच्चों की कोई फिल्म देखेंगे।

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