धूम मचाने वाले संगीतकार प्रीतम

धूम मचाने वाले संगीतकार प्रीतम

इन दिनों हिंदी फिल्मी संगीत की हॉट प्रॉपर्टी बने हुए हैं प्रीतम चक्रवर्ती। उन्हें हॉट प्रॉपर्टी इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि उनका संगीत लोकप्रियता के चरम पर है। लोगों को थिरकाने वाली उनकी धुनों को श्रोता खूब पसंद कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि धूम के धमाकेदार संगीत से प्रीतम ने लोकप्रियता का स्वाद चखना शुरू किया, जो आज भी बदस्तूर जारी है। वैसे, एक सच यह भी है कि अपने संगीत से पहचाने जाने वाले प्रीतम अब कैमरे के सामने यानी संगीत पर आधारित रिअॅलिटी शोज में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। स्टार प्लस के कार्यक्रम छोटे उस्ताद में बच्चों की संगीत प्रतिभा का मूल्यांकन करने के बाद इन दिनों वे जी टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम सारेगामापा चैलेंज 2009 में गुरु और जज की भूमिका निभा रहे हैं। पिछले दिनों प्रीतम से मुलाकात हुई, तो बातचीत की शुरुआत हुई इस सवाल के साथ कि सारेगामापा चैलेंज 2009 में वे एक तरफ धूम घराने के गुरु हैं, तो दूसरी तरफ निर्णायक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। कैसा लग रहा है दोनों काम करके? इस बारे में वे कहते हैं, शो सारेगामापा चैलेंज से जुड़कर अच्छा लग रहा है। इस मंच पर लोगों को नए टैलॅन्टेड सिंगर देखने और सुनने को मिलेंगे। जहां तक धूम घराने की बात है, तो केवल जीतना हमारा लक्ष्य नहीं होगा। दरअसल, मैंने अपने घराने के हर सिंगर से यही कहा है कि जीतना या हारना महत्वपूर्ण नहीं है। जीतने से ही आप प्लेबैक सिंगर नहीं बन जाएंगे और न ही हारने से आपका करियर खत्म हो जाएगा! यह मंच प्रतिभागियों के लिए अपना आत्मविश्वास बढ़ाने का मंच होगा। मैं चाहता हूं कि हर एक सिंगर पूरे आत्मविश्वास के साथ परफॉर्म करे।

प्रीतम से अगला सवाल हुआ कि रिअॅलिटी शो के निर्णायकों पर आमतौर पर प्रतिभागियों के लिए कठोर शब्द कहने के आरोप लगते हैं, जैसा कि हाल ही में एक शो के दौरान इस तरह की घटना घटी और प्रतिभागी को सदमा लगा और वह आवाज खो बैठी। वह आज भी उसी अवस्था में है। इस बारे में प्रीतम क्या कहेंगे? वे कहते हैं, जब मैं छोटे उस्ताद का जज था, तब भी मैंने कहा था कि एलिमिनेशन प्रॉसेस को रिअॅलिटी शो से हटा देना चाहिए। एलिमिनेशन से प्रतिभागियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ता है, खासकर बच्चों पर। रैंकिंग बेस्ट ऑप्शन है। पूरे शो के दौरान हर प्रतिभागी के परफॉर्मेस के अनुसार रैंकिंग देनी चाहिए। जहां तक कठोर शब्दों की बात है, तो छोटे उस्ताद के समय मैं अक्सर शूटिंग की शुरुआत में या बाद में प्रतिभागियों से मिलकर उनसे उनकी कमियों को लेकर बातें करता था। उन्हें और अच्छा करने के लिए क्या-क्या करना चाहिए, इस बारे में सलाह भी देता था। उनसे अपने किए गए कमेन्ट्स के बारे में भी बताता था कि वे उन चीजों पर ध्यान दें। इस तरह उन बच्चों की हौसलाअफजाई भी करता था।

रिअॅलिटी शो में होने वाले ड्रामे पर प्रीतम की क्या प्रतिक्रिया है? वे कहते हैं, देखिए, दर्शकों की नजर प्रतिभागियों की गायन प्रतिभा पर होती है, न कि शो में चलने वाले ड्रामा और गॉसिप पर! श्रोता जानना चाहते हैं कि कौन अच्छा गा रहा है और कौन नहीं? आजकल के दर्शक इतने स्मार्ट हैं कि वे स्क्रिप्ट के आधार पर होने वाले रिऐक्शन और नेचुरल रिऐक्शन में अंतर जान जाते हैं। मैं जज के बीच होने वाले झगड़ों से दूर रहना चाहता हूं। मुझे लगता है कि यह रिअॅलिटी शो प्रतिभागियों के लिए है, न कि जज या मेंटर के लिए। कोई माने या न माने, लेकिन यह सच है कि रिअॅलिटी शो केवल प्रतिभागियों के कारण ही चर्चा में रहते हैं और सफल हैं।

फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत प्रीतम ने फिल्म टेस्टी टिटबिट्स (1999) से की, लेकिन उन्हें पहली बार चर्चा मिली यशराज बैनर की फिल्म मेरे यार की शादी है से। इसमें उनका संगीत सराहा गया। खासकर गीत शरारा शरारा.. ने उन्हें चर्चा में ला दिया। उसके बाद उन्हें पीछे मुड़कर देखने का अवसर नहीं मिला। चॉकलेट, एक पल, गैंगस्टर, गरम मसाला, धूम, धूम-2, आवारापन, भूलभुलैया, ढोल, जब वी मेट, दन दना दन गोल, दस कहानियां, जन्नत, हाल-ए-दिल आदि के गीतों ने उन्हें स्टार संगीतकार बना दिया। अब उनकी संगीतबद्ध जो फिल्में आएंगी, वे हैं फौज में मौज, बिल्लू बारबर, लक आदि।

-सौम्या अपराजिता

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