भारत के आखिरी सुपरस्टार हैं शाहरूख

भारत के आखिरी सुपरस्टार  हैं शाहरूख

सबके चहेते शाहरूख  खान दो नवंबर को जीवन के नए बसंत में प्रवेश कर रहे हैं। उनके आकर्षक व्यक्तित्व, मधुर वाणी, मिलनसार स्वभाव और प्रभावी अभिनय की प्रशंसक सारी दुनिया है। यह तो शाहरूख  की मीडिया द्वारा स्थापित छवि है, लेकिन क्या हिंदी सिनेमा के इस सुपर स्टार के व्यक्तित्व का कोई और पहलू भी है? बता रहे हैं मुश्ताक शेख, जो शाहरूख  खान के अंतरंग  मित्र हैं। शाहरूख  खान के ऊपर उन्होंने दो पुस्तकें शाहरूख  कैन और स्टिल  रीडिंग  खान लिखी हैं।

निजी जीवन में शाहरूख  खान मेरी और आपकी तरह साधारण इंसान हैं। वे खुद को कभी गंभीरता से नहीं लेते और न ही मीडिया द्वारा मिलने वाली अटेंशन को गंभीरता से लेते हैं। वे घर में कैजुअली  रहते हैं। उनके घर का माहौल रीयल  होता है। वे न तो खुद और न ही अपने किसी करीबी द्वारा घर में स्टार की तरह बर्ताव करना पसंद करते हैं। घर में यदि कोई उन्हें मजाक में भी स्टार की तरह ट्रीट  करता है तो वे नाराज हो जाते हैं।

शाहरूख  बाहर के काम को घर के भीतर नहीं लाते। यह नियम उन्होंने स्वयं बनाया है। वे जब घर में होते हैं तो सारा समय आर्यन, सुहाना और गौरी को देते हैं। वे आर्यन के साथ गेम खेलते हैं। यदि सुहाना ने कोई कविता लिखी है तो उसे पढ़ते हैं। आर्यन  और सुहाना का होमवर्क  करवाते हैं। शाहरूख  को इससे ज्यादा खुशी दुनिया की किसी चीज से नहीं मिलती। वे कंप्लीट  फैमिली मैन हैं।

भारतीय मूल्यों, आदर्शो और संस्कारों में शाहरूख  खान दिल से यकीन करते हैं। वे भाई, पति, पिता, अभिनेता की अपनी सभी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाते हैं। यही वजह है कि वे हमेशा खुश एवं संतुष्ट नजर आते हैं। वे कभी रिश्तों का मखौल नहीं उड़ाते। ऐसा वे समाज को ध्यान में रखकर नहीं करते कि लोग क्या कहेंगे? यह उनके मिजाज में है। शाहरूख  की उम्र बहुत कम थी, जब उनके माता-पिता चल बसे। वे परिवार की वैल्यू जानते हैं इसीलिए अपने परिवार को संगठित रखते हैं।

शाहरूख  में ईष्र्या या बदले की भावना नहीं है। उनके शब्दकोश में यह शब्द ही नहीं है। शाहरूख  ऐसी शख्सियत है जो दूसरों में ईष्र्या पैदा कर देता है। शाहरूख  में हमेशा जीतने का जज्बा रहता है। यू नेवर विन  द  सिल्वर, यू लूज द गोल्ड.वे इस कहावत में यकीन करते हैं। शाहरूख  हमेशा जीतने के लिए खेलते हैं। वे जीतने के लिए जी-जान लगा देते हैं। उन पर हार का असर नहीं पड़ता। शाहरूख  सही मायने में पठान हैं।

शाहरूख  का एक ही लक्ष्य है, जीवन के अंतिम समय तक काम करते रहना। वे मानते हैं कि इंसान की पहचान उसके काम से होती है। अपने काम से ही इंसान निरंतर आगे बढ़ता रहता है। आज भी मैं शाहरूख  की फिल्म के सेट पर जाता हूं तो उनमें वही जोश देखता हूं जो दिल आशना है और बाजीगर फिल्म के सेट पर रहा होगा। वे काम से बोर नहीं होते। कैमरा ऑन होते ही वह अपना दो हजार प्रतिशत देते हैं। कंधा दुख रहा है या ऑपरेशन हुआ है, इस चीज से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। शाहरूख के लिए काम सर्वोपरि है। वे कहते रहते हैं कि ऊपर वाला काम में उनकी रूचि यूं ही बनाए रखे।

शाहरूख  खान भले ही उम्र की दहलीज पर दहलीज पार करते जा रहे हैं, लेकिन उनके अंदर आज भी दस साल का एक बच्चा  है। आप उन्हें कोई गिफ्ट दें तो उसके रैपर को वे दस साल के बच्चे  की तरह फाड़ते हैं। अगर आप लुत्फ उठाना चाहते हैं तो शाहरूख  को सात-आठ रैपर लगाकर गिफ्ट  दे दें। उसका रैपर फाड़ते वक्त उनका उत्साह देखने लायक होता है। अपने जन्मदिन पर मिलने वाले गिफ्ट  को लेकर वे बहुत उत्सुक रहते हैं। उन्हें गिफ्ट  खोलते हुए देखने का अलग ही मजा है।

शाहरूख  खान भारत के आखिरी सुपरस्टार  हैं। आजकल के सुपर स्टार फास्टफूड  की तरह हैं। हर फ्राइडे को एक नया सुपरस्टार पैदा हो जाता है। मुझे नहीं लगता कि आने वाले समय में कोई शाहरूख  खान की ऊंचाइयों और उपलब्धियों को टच कर पाएगा।

-रघुवेन्द्र सिंह

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